धर्मशाला। जिला मुख्यालय धर्मशाला में एक बार पुन: बुधवार को ठेकेदारों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और रैली निकाली। कोतवाली बाजार स्थित गांधी वाटिका से डीसी कार्यालय तक रैली निकालकर सरकार को ज्ञापन भेजा गया। ठेकेदारों ने वित्त विभाग पर पिंक एंड चूज नीति के तहत कार्य करने के आरोप लगाए हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि विभिन्न विभागों में ठेकेदारों के करीब 500 करोड़ रुपये के कार्यों के बिल नहीं बन पाए हैं। ट्रेजरी में भेजे गए टोकन भी पास नहीं हो पा रहे हैं, जिससे ठेकेदार आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। आलम यह है कि जिन ठेकेदारों ने लोन लेकर कार्य पूरे किए हैं, वे बैंक से ब्लैकलिस्ट और एनपीए हो रहे हैं। रैली का आयोजन ठेकेदारों द्वारा हाल ही में गठित संघर्ष समिति के बैनर तले किया गया।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष गोल्डी ने कहा कि सरकार को पहले भी ज्ञापन भेजकर 12 दिन का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिस कारण उन्हें पुन: सडक़ों पर उतरना पड़ा। गोल्डी ने आरोप लगाया कि प्रदेश का वित्त विभाग पिक एंड चूज की नीति के तहत कार्य कर रहा है। मंडी, शिमला, सिरमौर में ठेकेदारों को भुगतान कर दिया गया है, जबकि जिला कांगड़ा में अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। यहां तक कि दीपावली को भी भुगतान नहीं किए गए और दो साल से भुगतान नहीं किए जा रहे हैं।
एक्सईएन ट्रेजरी में भेज रहे टोकन, नहीं हो रहे पास
गोल्डी ने कहा कि सरकार की ओर से एक्सईएन को लेटर आफ क्रेडिट के माध्यम से पैसा दिया जाता है, कि ठेकेदारों को काम की पेमेंट कर दें, लेकिन एक्सईएन तो टोकन बनाकर ट्रेजरी में भेज रहे हैं, लेकिन ट्रेजरी में टोकन पास नहीं हो रहे हैं। कई ठेकेदारों को पहले यह भी पता नहीं था कि ट्रेजरी नाम की कोई चीज भी होती है, प्रदेश के इतिहास में पहली बार सुनने को मिल रहा है कि आज टे्रजरी बंद है। नए नियम बनाए जा रहे हैं कि पहली से दस तारीख तक ट्रेजरी में टोकन नहीं लगाए जा सकते। ठेकेदारों ने लिमिट और लोन लेकर काम किए हैं, लेकिन पेमेंट न होने के कारण ठेकेदार लिमिट में पैसो नहीं डाल पा रहे और न ही लोन चुका रहे हैं, जिससे ठेकेदार, बैंकों में एनपीए व ब्लैकलिस्ट हो रहे हैं।
डिप्टी सीएम ने मांगी 17 करोड़ के टोकन की डिटेल
गोल्डी ने बताया कि दो दिन पहले डिप्टी सीएम, ठेकेदारों से मिले थे, उन्होंने कहा है कि मेरे विभाग से संबंधित पेमेंटस 6 से 7 दिनों में कर दी जाएंगी। जल शक्ति विभाग के 17 करोड़ के टोकन की डिटेल भी डिप्टी सीएम ने मांगी है, जबकि अन्य विभागों से ऐसा कोई आश्वासन नहीं मिला है। संघर्ष समिति ने जिला से संबंधित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर सीएम से मिलने का समय दिलाने का आग्रह किया था, लेकिन अभी तक समय नहीं मिल पाया है। जानकारी मिली है कि सीएम 18 नवंबर को धर्मशाला आ रहे हैं, हमने डीसी कांगड़ा से आग्रह किया है कि हमें सीएम से मिलने का समय दिया जाए, जिससे ठेकेदारों की मांगों को उनके समक्ष उठाया जा सके।
विभिन्न विभागों में 400 से 500 करोड़ की पेंडेंसी
गोल्डी ने कहा कि हाल ही जानकारी मिली थी कि सीएम ने कहा था कि सी और डी श्रेणी के ठेकेदारों की 10 लाख पेमेंट कर दी जाएगी, लेकिन सीएम के आदेशों को भी विभाग व अधिकारी अनसुना कर रहे हैं। पेमेंट संबंधी 43 करोड़ के टोकन ट्रेजरी में लगे हैं, जबकि विभिन्न विभागों में 400 से 500 करोड़ की पेंडेंसी है, जिनके अभी तक बिल नहीं बने हैं। अधिकारी कहते हैं कि इस हेड में पैसे नहीं हैं।
डिप्रेशन में ठेकेदार, दिहाड़ी लगाने को मजबूर : रोहित
ठेकेदार रोहित शर्मा ने कहा कि 2 से 3 वर्षों से ठेकेदारों की पेमेंट नहीं हो रहे हैं। इससे पहले कभी भी ठेकेदार अपनी पेमेंट को लेकर इस तरह सडक़ों पर नहीं उतरे हैं। कई ठेकेदार सरकारी कार्यों की एवज में पेमेंट न होने से डिप्रेशन में आ गए हैं, कईयों ने अन्य कार्य करना शुरू कर दिए हैं। आलम यह है कि कई ठेकेदार, अब खुद को अन्य ठेकेदारों के पास दिहाड़ी मजदूरी के लिए रखने की बात तक कह रहे हैं।
