धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा अब साल में दो बार आयोजित की जाएगी। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के तहत लागू किया जा रहा है।
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बोर्ड अधिनियम-1968 की धारा 19(3) के तहत जारी आदेश में बताया कि:
- पहली (मुख्य) परीक्षा: फरवरी-मार्च 2026 में
- दूसरी (सुधार) परीक्षा: जून-जुलाई 2026 में
मुख्य परीक्षा के बाद छात्रों का वर्गीकरण
मुख्य परीक्षा के परिणाम के आधार पर छात्रों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा:
- आवश्यक सुधार (Essential Improvement)
→ दो विषयों में फेल या कम अंक वाले छात्र
→ इन्हें सुधार परीक्षा में केवल दो विषय ही देने होंगे - वैकल्पिक सुधार (Optional Improvement)
→ सभी विषयों में पास छात्र
→ अधिक अंक लाने के लिए अधिकतम तीन विषयों में सुधार परीक्षा दे सकते हैं - अनिवार्य पुनरावृत्ति (Compulsory Repetition)
→ तीन या उससे अधिक विषयों में फेल छात्र
→ ये छात्र दूसरी (सुधार) परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे, इन्हें कक्षा दोहरानी पड़ेगी
विशेष प्रावधान
- खेल, प्रतियोगिता, खराब मौसम, बीमारी या दुर्घटना जैसी वजह से पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहे छात्रों को दूसरी परीक्षा में पूरा पेपर देने का मौका मिलेगा।
- दोनों परीक्षाओं में से जो अंक बेहतर होंगे, वही अंतिम परिणाम में मान्य होंगे।
- परिणाम घोषणा: पहली परीक्षा का परिणाम अप्रैल-मई में, दूसरी का जुलाई-अगस्त में।
+1 में दाखिला
आवश्यक सुधार श्रेणी के छात्रों को 11वीं कक्षा में अस्थायी प्रवेश मिल सकेगा, बशर्ते वे सुधार परीक्षा पास कर लें।
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि इस व्यवस्था से छात्रों पर एक बार की परीक्षा का दबाव कम होगा और उन्हें अपनी गलतियों सुधारने का दूसरा मौका मिलेगा। यह कदम NEP-2020 की भावना के अनुरूप है, जिसमें छात्रों के सर्वांगीण विकास और तनाव मुक्त परीक्षा प्रणाली पर जोर दिया गया है।
यह नई व्यवस्था 2025-26 सत्र से लागू होगी, यानी पहली बार फरवरी-मार्च 2026 में परीक्षा देने वाले छात्रों पर लागू होगी।
