बैजनाथ (कांगड़ा), 29 नवंबर। बैजनाथ-पपरोला नगर परिषद में भारी प्रशासनिक अनियमितता का मामला सामने आया है। विजिलेंस व प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद खाली होने के बावजूद म्युनिसिपल एक्ट-1994 की धारा-37 का दुरुपयोग कर 1.26 करोड़ रुपये के 33 विकास कार्यों के टेंडर बिना परिषद की मंजूरी के जारी कर दिए गए।
जानकारी के अनुसार, पिछले साल 20 फरवरी को तत्कालीन अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद दोनों पद करीब आठ महीने तक रिक्त रहे। नई नियुक्तियां 9 जुलाई को हुईं और वर्तमान अध्यक्ष ने 20 अगस्त को कार्यभार ग्रहण किया। लेकिन इसी बीच 6 अगस्त और 16 अगस्त को नगर परिषद के अधिकारियों ने 1.26 करोड़ रुपये के कार्यों के टेंडर जारी कर दिए, जबकि नियमों के अनुसार अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में धारा-37 के तहत केवल आपदा या जान-माल को तत्काल खतरा होने जैसे अति आवश्यक कार्य ही किए जा सकते हैं। सामान्य विकास कार्यों के लिए परिषद की बैठक और स्वीकृति अनिवार्य है।
मामला उस समय गरमाया जब नगर परिषद के 11 में से 6 पार्षदों ने विकास कार्यों में व्यापक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। पार्षदों की शिकायत पर हिमाचल प्रदेश सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए। वर्तमान में विजिलेंस, प्रशासनिक और नगर परिषद स्तर पर तीन अलग-अलग जांच चल रही हैं।
एसडीएम बैजनाथ संकल्प गौतम ने बताया कि प्रशासनिक जांच अंतिम चरण में है और रिपोर्ट शीघ्र उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी चमन कपूर ने भी पुष्टि की कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट जल्द एसडीएम को सौंप दी जाएगी।
स्थानीय लोगों और पार्षदों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि के टेंडर बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के जारी करना न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि भ्रष्टाचार की गंभीर आशंका भी पैदा करता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई को लेकर सभी की नजरें टिकी हैं।
