28.7 C
Baijnath
May 14, 2026
Shimla

हिमाचल प्रदेश में सूखे जैसे हालात: गेहूं, सेब और कांगड़ा चाय सहित कई फसलें प्रभावित, उत्पादन घटने की आशंका

शिमला 19 दिसंबर 2025: हिमाचल प्रदेश में करीब ढाई महीने से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। नवंबर में सामान्य से 95-99 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि दिसंबर में अब तक 100 प्रतिशत कमी है। इससे रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है और बागवानी पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। किसान और बागवान चिंतित हैं कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो इस साल उत्पादन में भारी कमी आ सकती है।

गेहूं की फसल पर संकट

प्रदेश में गेहूं की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जिलों में किसान बारिश के इंतजार में खेत खाली छोड़ने को मजबूर हैं।

  • ऊना जिले में गेहूं की फसल पीली पड़ चुकी है। बंगाणा, जोल, तलमेहड़ा, अंब, हरोली, गगरेट और चिंतपूर्णी क्षेत्रों के खेत पूरी तरह सूख गए हैं। कुओं का जलस्तर बरसात के मुकाबले 10 फीट नीचे गिर चुका है।
  • चंबा जिले में 10 प्रतिशत किसान गेहूं की बुवाई नहीं कर पाए हैं।
  • कांगड़ा जिले में 92 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं बोया जाता है, लेकिन सिंचाई सुविधा न होने से करीब 10 प्रतिशत किसानों ने बुवाई नहीं की। कई चंगर क्षेत्रों में फसल संकट में है।
  • मंडी जिले में 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई होती है, लेकिन अभी तक 11 हजार हेक्टेयर में बुवाई नहीं हो पाई। जिले में 82 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुवाई हुई है।
  • हमीरपुर जिले में 28 हजार हेक्टेयर पर गेहूं बोया जाता है। सुजानपुर, भोरंज, नादौन और बमसन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां फसल पीली पड़ने लगी है। कृषि विभाग के उपनिदेशक शशिपाल अत्री के अनुसार, अगर 15 दिन में बारिश नहीं हुई तो 5-10 प्रतिशत नुकसान हो सकता है।

सेब और अन्य फलों पर असर

बारिश न होने से सेब बागवानों की चिंता बढ़ गई है। नई प्रजातियों के लिए जरूरी चिलिंग ऑवर्स पूरे नहीं हो रहे, जिससे फ्लावरिंग और पैदावार प्रभावित हो सकती है।

  • करसोग, सराज, सदर, कटौला, सरकाघाट, धर्मपुर, सुंदरनगर और बल्ह क्षेत्रों में सेब, आम, अमरूद, संतरा, लीची, अनार, गलगल और जापानी फल की खेती प्रभावित।
  • बागवान नए पौधों का रोपण नहीं कर पा रहे हैं। उद्यान विभाग के उपनिदेशक राजेश्वर परमार ने बताया कि फलदार पौधों का वितरण देरी से हो रहा है।
  • नकदी फसलों जैसे मूली, गोभी, मटर, प्याज और लहसुन पर भी असर पड़ा है। मंडी में 4520 हेक्टेयर पर इन फसलों का उत्पादन होता है।

कांगड़ा चाय का उत्पादन खतरे में

कांगड़ा चाय पर भी सूखे का गहरा असर पड़ सकता है। प्रदेश में धर्मशाला, पालमपुर, बैजनाथ, बीड़ और चौंतड़ा क्षेत्रों में औसतन 10 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है।

  • जनवरी तक बारिश न हुई तो उत्पादन में कमी आएगी। सूखी जमीन से पौधों को पोषक तत्व नहीं मिल रहे, जिससे मार्च में नई पत्तियां नहीं आएंगी।
  • इस समय पौधों की कटाई-छंटाई चल रही है, लेकिन नमी की कमी से नए सीजन का उत्पादन और कारोबार प्रभावित होगा।

लहसुन की फसल तबाह

सिरमौर जिले में लहसुन की करीब 20 प्रतिशत फसल प्रभावित हो चुकी है। सैनधार, धारटीधार, गिरिपार, राजगढ़ और पच्छाद क्षेत्रों में लहसुन की ज्यादा खेती होती है।

  • विभाग का लक्ष्य 4050 हेक्टेयर पर 60 हजार मीट्रिक टन उत्पादन था, लेकिन बारिश न होने से पौधों की ग्रोथ रुक गई है। किसान राजेंद्र जैसे कई किसानों ने महंगे बीज खरीदे, लेकिन फसल नहीं बढ़ पा रही।

मौसम विभाग के अनुसार, 20-21 दिसंबर को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी के आसार हैं, लेकिन मैदानी और निचले क्षेत्रों में अभी राहत की उम्मीद कम है। किसान और बागवान बारिश के इंतजार में हैं, वरना इस साल कृषि और बागवानी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

Related posts

दिल्ली में CM सुक्खू और प्रतिभा : कैबिनेट विस्तार और संगठन पर होगी अहम चर्चा

Admin

हिमाचल: ईडी की बड़ी कार्रवाई, QFX Fraud में 170 करोड़ जब्त, 30 से अधिक बैंक खातेे सीज

Admin

Himachal News: HAS अधिकारी ओशिन शर्मा के नाम पर फर्जी फेसबुक अकाउंट, AI से बनी आपत्तिजनक फोटो वायरल; पुलिस ने दर्ज किया केस

Admin

Leave a Comment