April 13, 2026
Baijnath

Baijnath Paprola News : आस्था से खिलवाड़… खीर गंगा घाट बना दिया कूड़ाघर

बैजनाथ। 21 जनवरी (कांगड़ा) – हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ में स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर के ठीक नीचे बहती बिनवा नदी के किनारे खीर गंगा घाट सदियों से धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा है। इसे स्थानीय लोग ‘मिनी हरिद्वार’ के नाम से पुकारते हैं। यहां गरीब परिवार हरिद्वार जाने में असमर्थ होने पर अपने परिजनों की अस्थियां विधि-विधान से विसर्जित करते हैं। पूजा-पाठ, संस्कार और किरया-कर्म जैसे पवित्र कार्यों का यह प्रमुख केंद्र है, जो बैजनाथ और आसपास के दूर-दराज इलाकों के श्रद्धालुओं की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

लेकिन आज यह पवित्र घाट बदहाली के आंसू बहा रहा है। आस्था और परंपरा की आड़ में लोग नदी में कपड़े, बाल, प्लास्टिक बैग, कार्ड, शीशे की तस्वीरें और अन्य अपशिष्ट सामग्री फेंक रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कुछ लोग मृतकों के पुराने बिस्तर और कपड़े तक घाट पर छोड़कर चले जाते हैं। इससे घाट कूड़ेदान में तब्दील हो चुका है, और बिनवा नदी की पवित्रता पर खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है।

स्थानीय बुद्धिजीवी, श्रद्धालु और पुजारी इस स्थिति पर गहरी चिंता जता रहे हैं। महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित राम मिश्रा और अन्य लोगों का कहना है कि खीर गंगा घाट अत्यंत पवित्र है, लेकिन आस्था के नाम पर गंदगी फैलाई जा रही है। विधायक, उपमंडल अधिकारी, नागरिक मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और अन्य अधिकारी बार-बार योजनाएं बनाते हैं, घाट के रखरखाव के लिए प्रबंध किए जाते हैं, लेकिन बिनवा नदी में फेंकी जा रही गंदगी पर कोई ठोस और पुख्ता कार्रवाई नहीं हो रही। इससे हर किसी की भावनाएं आहत हो रही हैं।

यह स्थिति न केवल धार्मिक स्थल की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि पर्यावरण और प्राकृतिक धरोहर के लिए भी खतरा बन गई है। बिनवा नदी पहले से ही विभिन्न स्रोतों से प्रदूषण का शिकार रही है, और अब धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी गंदगी ने समस्या को और गहरा कर दिया है।

कुल मिलाकर, खीर गंगा घाट की मौजूदा स्थिति समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि आस्था के साथ जिम्मेदारी नहीं निभाई गई, तो हमारी ऐसी पवित्र धार्मिक और प्राकृतिक धरोहरें धीरे-धीरे नष्ट हो जाएंगी। आवश्यकता है कि श्रद्धा को स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाए। स्थानीय प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और श्रद्धालुओं को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे – जैसे जागरूकता अभियान चलाना, कूड़ा निपटान की बेहतर व्यवस्था करना, साइन बोर्ड लगाना और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना – ताकि खीर गंगा जैसी पवित्र धारा अपनी धार्मिक गरिमा और प्राकृतिक शुद्धता बनाए रख सके।

समय आ गया है कि आस्था को गंदगी से अलग कर स्वच्छता के साथ जोड़ा जाए, अन्यथा हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को हमेशा के लिए खो देंगे।

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