बैजनाथ (वीर खड़का ), 2 फरवरी 2026
जिला कांग्रेस कमेटी कांगड़ा के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए 2026-27 के यूनियन बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे हिमाचल प्रदेश की जनता के लिए पूरी तरह निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में राज्य के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है और पहाड़ी प्रदेश की विशेष जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य को, जो बार-बार आपदाओं से प्रभावित होता है और सीमित संसाधनों वाला है, केंद्र से विशेष आर्थिक सहयोग की अपेक्षा थी। लेकिन बजट में न तो राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) की बहाली की गई, न ही बागवानी, सेब उत्पादकों, पर्यटन, कृषि, युवाओं या कर्मचारियों के लिए कोई ठोस राहत पैकेज घोषित किया गया।
उन्होंने विशेष रूप से 16वें वित्त आयोग की सिफारिश पर आपत्ति जताई, जिसमें हिमाचल जैसे छोटे पहाड़ी राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान को समाप्त कर दिया गया है। शर्मा ने इसे राज्य की आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार बताया। उन्होंने कहा, “यह निर्णय राज्य की विकास योजनाओं को बुरी तरह प्रभावित करेगा और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। केंद्र ने हिमाचल की भौगोलिक चुनौतियों, 67 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र, उच्च सेवा वितरण लागत और हाल की आपदाओं से हुए 15,000 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान को पूरी तरह अनदेखा किया है।”
अनुराग शर्मा ने बजट को जनविरोधी और राज्य-विरोधी सोच का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह स्पष्ट करता है कि भाजपा की केंद्र सरकार को हिमाचल की जनता की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार तत्काल हिमाचल प्रदेश के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करे, राजस्व घाटा अनुदान बहाल करे और आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान करे, ताकि प्रदेश विकास की गति बनाए रख सके।
शर्मा ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए हर मंच पर संघर्ष जारी रखेगी और जनता की आवाज को मजबूती से उठाती रहेगी।
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी बजट को “काला दिन” बताते हुए राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति पर गहरी निराशा जताई है और इसे पहाड़ी राज्यों के साथ अन्याय करार दिया है। कांग्रेस नेता इसे केंद्र की “एंटी-हिमाचल” नीति का हिस्सा मान रहे हैं।
