शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने रविवार को नशा तस्करी के एक बड़े मामले में फंसे चार पुलिसकर्मियों को तुरंत बर्खास्त कर दिया। ये वो लोग थे जिनका काम समाज को नशे से बचाना था, लेकिन जांच में सामने आया कि उन्होंने खुद ही तस्करी के माल को ‘सुरक्षित’ रख लिया।
मामला है लगभग एक करोड़ रुपये के एलएसडी (लाइसर्जिक एसिड डाइथाइलमाइड) का। स्पेशल टास्क फोर्स (STF) कुल्लू में तैनात कॉन्स्टेबल नितेश, कॉन्स्टेबल अशोक, हेड कॉन्स्टेबल राजेश कुमार और हेड कॉन्स्टेबल समीर कुमार को 19 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। ये चारों उस समय सीआईडी के अधीन STF में ड्यूटी पर थे।
हिमाचल में नशे से जुड़े मामलों में अब तक कुल 24 सरकारी कर्मचारी बर्खास्त हो चुके हैं। इनमें 15 पुलिस वाले और 9 दूसरे विभागों के हैं। इसके अलावा 109 सरकारी कर्मचारियों पर नशे से संबंधित मामले दर्ज हैं। न्यू शिमला पुलिस की टीम ने इस पूरे खेल को सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रैकिंग से उजागर किया। वित्तीय लेन-देन के सबूत भी हाथ लगे।
पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने साफ कहा, “विभाग के अंदर भी जीरो टॉलरेंस है। जो भी पुलिसकर्मी युवाओं का भविष्य बर्बाद करने वाले नशे के खेल में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी। कानून से ऊपर कोई नहीं।”
कैसे पकड़ा गया ये गंदा खेल?
7 मार्च को STF कुल्लू को सूचना मिली थी कि नेविल हैरिसन नाम का विदेशी व्यक्ति 8 मार्च को भुंतर पहुंच रहा है, साथ में भारी मात्रा में एलएसडी और एमडीएमए। चारों जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। नेविल के पास से 1450 स्ट्रिप्स एलएसडी और 30 ग्राम एमडीएमए बरामद हुआ। लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। मादक पदार्थ अपने कब्जे में रख लिया और बाद में तस्कर संदीप शर्मा को 616 स्ट्रिप्स थमा दीं।
जांच में सब कुछ खुल गया। 8 मार्च को चारों जवानों और आरोपियों की लोकेशन एक ही जगह कुल्लू में मिली। ATF के रिकॉर्ड में उस दिन कोई विशेष ऑपरेशन दर्ज नहीं था। न ही किसी सीनियर अधिकारी को मिशन की कोई जानकारी दी गई थी। कॉल डिटेल्स, सीसीटीवी और पूछताछ के आधार पर इनकी संलिप्तता साबित हुई। सीआईडी ने संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत तुरंत कार्रवाई की। चारों अभी चार दिन के पुलिस रिमांड पर हैं और सोमवार को अदालत में पेश किए जाएंगे।
मुख्य गिरफ्तारी कैसे हुई?
10 मार्च को न्यू शिमला पुलिस ने शिमला के बीसीएस इलाके में हिम निवास से संदीप शर्मा (40, मोगा पंजाब) और प्रिया शर्मा (26, सिरमौर) को 562 स्ट्रिप्स एलएसडी (11.57 ग्राम) के साथ पकड़ा। आगे की पूछताछ में हरियाणा के गुरुग्राम से नेविल हैरिसन (मूल केरल निवासी) गिरफ्तार हुआ, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सप्लायर बताया जा रहा है। एलएसडी को किताबों में छिपाकर शिमला लाया गया था।
प्रारंभिक जांच में नेटवर्क गोवा, दिल्ली समेत कई राज्यों से जुड़ा होने के संकेत मिले हैं। एक स्ट्रिप एलएसडी की कीमत करीब 10 हजार रुपये बताई जा रही है।
एलएसडी क्या है और क्यों इतना खतरनाक?
यह एक शक्तिशाली सिंथेटिक हैलुसिनोजेनिक ड्रग है, जो कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों (ब्लॉटर) पर बेचा जाता है। मस्तिष्क के सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर करता है। सोच, व्यवहार और हकीकत की धारणा पूरी तरह बदल देता है। रंगहीन, गंधहीन लेकिन बेहद खतरनाक। कानून में इसके लिए 20 साल तक की सजा का प्रावधान है।
पिछले छह महीने में हिमाचल की पुलिस की सख्ती
पुलिस ने कुख्यात तस्करों के खिलाफ पिट-एनडीपीएस एक्ट का इस्तेमाल तेज कर दिया है। अभियान शुरू होने के बाद अब तक 96 तस्करों को हिरासत में लिया गया। शिमला, देहरा, नूरपुर और ऊना जैसे जिलों में आठ बड़े तस्करों के खिलाफ बंदी आदेश जारी किए गए। तस्करों की चल-अचल संपत्ति जब्त करने का सिलसिला भी चल रहा है।
10 मार्च को विशेष अभियान में 20,000 से ज्यादा वाहनों की जांच हुई, जिसमें चरस और चिट्टा की खेपें बरामद हुईं। पंचायतों को नशा तस्करी और इस्तेमाल के आधार पर रेड, येलो और ग्रीन जोन में बांटा गया है ताकि हर इलाके पर नजर रखी जा सके।
हिमाचल पुलिस अब साफ संदेश दे रही है — नशा तस्करी में चाहे कोई भी शामिल हो, चाहे वो वर्दी वाला ही क्यों न हो, बचने का कोई रास्ता नहीं।
