23 मार्च 2026 बैजनाथ (वीर खड़का)
लंबे समय से अधर में लटकी होली-उतराला सड़क को लेकर स्थानीय लोगों की उम्मीदें अब नई सांसद से जुड़ गई हैं। आज बैजनाथ-भरमौर क्षेत्र की ‘होली उतराला सड़क चिंतन समिति’ का एक प्रतिनिधिमंडल नवनियुक्त राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा से मिला और इस महत्वपूर्ण सड़क निर्माण को गति देने की जोरदार गुहार लगाई।
समिति ने सांसद को विस्तार से बताया कि यह सड़क न सिर्फ बैजनाथ और भरमौर को जोड़ने का सबसे छोटा रास्ता है, बल्कि इलाके के हजारों लोगों के लिए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच का जीवनरेखा भी है। लेकिन दशकों से सिर्फ आश्वासन और आंशिक काम ही हुआ है, पूरा रोड आज भी अधूरा पड़ा है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य रूप से ये बातें रखीं:
- साल 2003 में सोखडु फोरवे से भतढेलू तक करीब 5 किमी सड़क बन चुकी थी। उसके बाद भी नवर्ड जैसी एजेंसियों से लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
- फिलहाल उत्तराला से फेंचा के पानी तक 13 किमी का काम चल रहा है। इसके आगे का हिस्सा दो चरणों में प्रस्तावित है—13 से 19 किमी और फिर 19 से 32 किमी तक। अच्छी बात ये कि दूसरे चरण के लिए करीब 9 करोड़ की DPR मंजूर हो चुकी है।
- लेकिन समिति का सबसे बड़ा सवाल और सुझाव यही है—तीसरे चरण की DPR पुराने सर्वे के आधार पर न बनाई जाए। समिति के अपने सर्वे के मुताबिक, विभाग द्वारा बताई जा रही कुल लंबाई (लगभग 20 किमी) वास्तव में आधी ही निकलती है। अगर सही मसौदे और वास्तविक दूरी के हिसाब से काम हुआ तो सरकारी खजाने पर बोझ आधा रह जाएगा और समय भी बचेगा।
- समिति ने साफ कहा—अगर मौजूदा DPR जनता की मांग के खिलाफ या गलत आधार पर बनी है, तो जनता का क्या दोष? जनता का पैसा बर्बाद क्यों हो? सरकार जनता के लिए बनी है, तो जनता की बात मानकर काम करवाना चाहिए। इससे दोनों तरफ फायदा—जनता को बेहतर सड़क जल्दी मिलेगी और सरकार का खर्च भी बचेगा।
चिंतन समिति ने सांसद से आग्रह किया कि अगर उनके साथ मिलकर या उन्हें विश्वास में लेकर नया सर्वे करवाया जाए, तो ये बड़ा बदलाव ला सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने भरोसा जताया कि सांसद अनुराग शर्मा इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेंगे और जल्द ही ठोस कदम उठवाएंगे।
इलाके के लोग अब उम्मीद की नजर से देख रहे हैं कि क्या इस बार पुरानी मांग को नई सरकार और नए सांसद के हाथों पूरा होने का मौका मिलेगा? क्योंकि सड़क सिर्फ पत्थर-मिट्टी की नहीं, बल्कि सपनों और रोजमर्रा की जिंदगी की राह है।
