बैजनाथ 22 मार्च 2026
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जो बजट पेश किया है, उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। भाजपा के पूर्व विधायक मुल्खराज प्रेमी ने इस बजट को जमकर खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि यह महज आंकड़ों का जटिल जाल है, जिसमें आम आदमी की असली समस्याओं का कोई हल नहीं दिखता।
प्रेमी ने सीधे-सीधे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पहले “मित्रों की सरकार” चला रहे थे, जिसमें अपने खास लोगों को खूब फायदा पहुंचाया गया। अब वक्त बदला तो खुद मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अफसरों के वेतन में कटौती का ऐलान कर जनता से सहानुभूति बटोरने की कोशिश की जा रही है। उनका सवाल है—अगर पहले से ही फिजूलखर्ची पर लगाम लगाई होती और चहेतों को अनुचित लाभ न पहुंचाया जाता, तो आज प्रदेश आर्थिक संकट में क्यों फंसा होता?
पूर्व विधायक ने सबसे ज्यादा निशाना उन चुनावी वादों पर साधा, जिनके दम पर कांग्रेस ने सत्ता हासिल की थी। याद दिलाते हुए उन्होंने कहा, “जनता से वोट मांगते वक्त हर घर को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और हर महिला को 1500 रुपये महीना देने का वादा किया गया था। लेकिन अब क्या मिल रहा है? बस कुछेक महिलाओं को और वो भी सीमित दायरे में। गरीब परिवार, जहां बिजली की खपत पहले से ही बहुत कम है, उन्हें भी ‘अतिरिक्त’ 300 यूनिट का लालच दिखाया जा रहा है।”
उनका मानना है कि यह बजट गरीबों, युवाओं, मध्यम वर्ग, किसानों और बुजुर्गों के खिलाफ है। प्रेमी का कहना है कि अगर सरकार वाकई जनकल्याण चाहती तो पुराने वादों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाती, न कि सिर्फ आंकड़ों के खेल से जनता को भ्रमित करती।
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब प्रदेश की आर्थिक स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और केंद्र से मिलने वाली कुछ पुरानी मदद भी प्रभावित हो रही है। सवाल यह है कि क्या यह बजट वाकई राहत देगा या सिर्फ कागजों पर अच्छा लगेगा? आम हिमाचली इसी का जवाब तलाश रहा है।
