बैजनाथ (पपरोला) वीर खड़का June 27, 2026
“जब मैंने पहली बार इंडिया की जर्सी पहनी, तो मुझे महसूस हुआ कि यह सिर्फ एक जर्सी नहीं, बल्कि 148 करोड़ भारतीयों की उम्मीदें हैं।” यह भावुक और गर्व से भरे शब्द हिमाचल प्रदेश की उस लाड़ली के हैं, जिसने सात समंदर पार देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
बैजनाथ उपमंडल के पपरोला-मलघोटा की होनहार बास्केटबॉल खिलाड़ी काव्या शर्मा यूरोप के सर्बिया (रूस क्षेत्र) में आयोजित वर्ल्ड स्कूल गेम्स बास्केटबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर वापस लौट आई हैं। पूरे भारत से चयनित महज 12 खिलाड़ियों में हिमाचल से इकलौती जगह बनाने वाली काव्या की इस सफलता से पूरे प्रदेश में जश्न का माहौल है।
5 में से 3 मैच जीतकर भारत रहा 17वें स्थान पर
13 जून से 23 जून तक सर्बिया में आयोजित हुई इस अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। पूरे देश के विभिन्न राज्यों (जैसे पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और हिमाचल) से चुनकर गए 60 में से 12 शीर्ष खिलाड़ियों की इस टीम ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए 5 में से 3 मैचों में जीत हासिल की और दुनिया भर की टीमों के बीच 17वां स्थान प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री ने दी बधाई
काव्या की इस अद्वितीय उपलब्धि पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित कई गणमान्य नेताओं ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।
घर के छोटे से नेट से अंतरराष्ट्रीय कोर्ट तक का सफर
लगभग 6 फीट लंबी काव्या को बचपन से ही खेलकूद में गहरी रुचि थी। उनकी लंबाई और लगन को देखकर पपरोला के व्यवसायी पिता विकास शर्मा ने घर पर ही बास्केटबॉल का एक छोटा नेट लगा दिया था, जहां से उनके करियर की शुरुआत हुई। उनकी प्रारंभिक शिक्षा परमार्थ इंटरनेशनल स्कूल बैजनाथ से हुई।
महज 15 वर्ष की आयु (आठवीं कक्षा) में उनका चयन बास्केटबॉल गर्ल्स हॉस्टल सरकाघाट के लिए हुआ। काव्या की माता रुचिका अवस्थी (शर्मा) बताती हैं कि शुरुआत में हॉस्टल का माहौल काफी चुनौतीपूर्ण था और कई बार मन किया कि बेटी को वापस बुला लें, लेकिन काव्या के दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास के आगे मुश्किलें हार गईं। वह पंडित गया प्रसाद की पौत्री हैं।
कोच राकेश ठाकुर को दिया सफलता का श्रेय
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने के बाद काव्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और विशेष रूप से अपने कोच राकेश ठाकुर (निवासी सरकाघाट) को दिया। काव्या ने कहा कि कोच साहब के कठिन परिश्रम और निरंतर मार्गदर्शन की वजह से ही आज वह इस मुकाम पर पहुंच सकी हैं।
युवाओं के लिए काव्या का संदेश:
“कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। अगर आप एकाग्र (Focused) होकर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती।”
घर लौटने पर भव्य स्वागत और भंडारा
बेटी की इस ऐतिहासिक कामयाबी की खुशी में काव्या के माता-पिता और पूरे परिवार ने घर पर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया। ग्रामीणों ने भजन-कीर्तन के साथ काव्या का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर पूरे क्षेत्र के लिए एक भव्य भंडारे का भी आयोजन किया गया, जहां सभी ने बेटी को आशीर्वाद और बधाई दी।
