January 22, 2026
Mandi

भोलेनाथ ने अपनी त्रिनेत्र से जलाकर भस्म किया था कामदेव को 

5 जून (वीर खड़का) पद्धर

 शिव को जब भी क्रोध आता है तो उनका तीसरा नेत्र खुल जाता हैं जिससे संपूर्ण पृथ्वी अस्त व्यस्त हो जाती हैं ऐसा ही एक प्रसंग है शिव और कामदेव से जुड़ा जब कामदेव को शिव ने भस्म कर दिया।, तो आइए जानते हैं। जब दक्ष प्रजापति ने शिव और अपनी पुत्री सती को छोड़कर सारे देवी देवताओं को अपने यज्ञ में आमंत्रित किया तो देवी सती अपने पति शिव का यह तिरस्कार सहन नहीं कर पाती हैं और यज्ञवेदी में कूदकर आत्मदाह कर लेती हैं जब यह बात शिव को पता चली तो वह अपने तांडव से पूरी सृष्टि में हाहाकार मचा देते हैं इससे व्याकुल सारे देवता शिव को समझाने कैलाश पहुंचे। शिव देवताओं को समझाने पर शांत तो हो जाते हैं लेकिन शिव परम शांति के लिए गंगा तमसा के पवित्र संगम पर आकर समाधि में लीन हो जाते हैं। 

माता सती की मृत्यु के बाद शिव समस्त संसार को त्याग देते हैं उनके बैरागी होने से संसार सही से नहीं चल पाता। दूसरी ओर पार्वती के रूप में सती का पुनर्जन्म होता हैं। इस बार पार्वती शिव से विवाह करने की इच्छा जताती हैं शिव के मन में प्रेम और काम भाव नहीं था। वह पूर्ण रूप से बैरागी हो चुके। इस वजह से ​श्री विष्णु और उनके साथ सभी देवता संसार के कल्याण के लिए कामदेव से सहायता लेते हैं। कामदेव अपने अनेक प्रयत्नों के द्वारा शिव को ध्यान से जगाने का प्रयास करते हैं अंत में काम देव शिव को जगाने के लिए खुद को आम के पेड़ के पीछे छिपा कर शिव पर पुष्प वान चलाते हैं।

पुष्पबान सीधे जाकर शिव के ह्रदय में लगता हैं और उनकी समाधि टूट जाती हैं इसके बाद शिव क्रोधित होते हैं और आम के पेड़ के पीछे छुपे काम देव को अपनी त्रिनेत्र से जलाकर भस्म कर देते हैं अपने पति की राख को रति अपने शरीर पर मलकर विलाप करने लगती हैं और शिव से न्याय की मांग करती हैं। शिव को यह ज्ञात हुआ कि संसार के कल्याण के लिए देवताओं के द्वारा बनाई गई यह योजना थी तो शिव ने रति को वचन देते हैं कि उनका पति यदुकुल में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेगा। बाद में कामदेव ने कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पैदा होते हैं और देवी रति से पुन उनका मिलन भी हो जाता है ।

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