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October 2, 2026
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बैजनाथ के लुलानी गांव का जख्म फिर से हरा हुआ।

बैजनाथ,13 जुलाई

बीते दिनों हुई बारिश की तबाही के साथ ही बैजनाथ के लुलानी और मुल्थान गांवों के जख्म भी हरे हो गए हैं। लुलानी गांव में वर्ष 2002 में जबकि 2015 में मुल्थान में बादल फटने की वजह से बाढ़ आई थी जिससे दोनों गांव जलमग्न हो गए था। सेवानिवृत्त प्राचार्य सुभाष चंद्र ठाकुर बताते हैं कि इस भयानक त्रासदी ने उनकी माता क्यारों देवी, बेटी मिनाक्षी और भांजी सुनीता बाढ़ की भेंट चढ गई थीं, जबकि पूरा गांव तहस-नहस हो गया था। इस त्रासदी के बाद खौफ के साए में रहने के बजाय अधिकांश गांव वासियों ने पलायन करना बेहतर समझा। गांव में आज भी मरघट सी खामोशी छाई रहती है। अधिकारियों और नेताओं ने उस समय गांव के पुनर्वास के लिए कई घोषणा की थी मगर आज दिन तक एक पुलिया तक नहीं बन पाए है। आज भी गांव के अधिकांश घरों पर ताले लटके हैं और दरवाजे और खिड़कियों की चौखट पर मकड़ी के जाले जम चुके हैं। हालत यह है कि गांव में लौटने के लिए अब कोई भी तैयार नहीं है। उधर बादल फटने का कहर झेल चुके मुल्थान गांव के वाशिंदे हल्की सी बरसात के बाद सिहर उठते हैं। क्षेत्र के ग्रामीण रामलाल संजय कुमार विजय कुमार बताते हैं कि बाढ़ के वक्त पूरा गांव जलमग्न हो गया था। अधिकांश दुकानें, बैंक, पंचायत घर और कई मकान बह गए थे। जलमग्न हो चुके प्राइमरी हेल्थ सेंटर में दाखिल मरीजों और उनके तीमारदारों को बमुश्किल बाहर निकाला था। आज एक बार फिर बरसात की वजह से छोटा भंगाल का मूल्थान गांव बर्बादी के ढर्रे पर खड़ा है।

फोटो

खंडहर में तब्दील हो चुके घर जहां बाढ़ से पहले लोग रहा करते थे।

साभार पंजाब केसरी।

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