पधर
अध्यापक संघ के जिला मंडी के अध्यक्ष दयाराम ठाकुर ने कहा है उप शिक्षा सचिव ने 19 सितंबर को जो अधिसूचना जारी की है उस अधिसूचना में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि माध्यमिक स्कूलों में शारीरिक अध्यापक , कला एवं शिल्प अध्यापको का युक्तिकरण जिन माध्यमिक विद्यालयों में 100 से कम विद्यार्थी पढते हैं उन माध्यमिक विद्यालयों से कला एवं शिल्प अध्यापको को युक्तिकरण राजकीय उच्च विद्यालयों और वरिष्ठ माद्यमिक पाठशालाओं में किया जाएगा । जबकि हिमाचल प्रदेश में ऐसा एक भी माध्यमिक स्कूल नही होगा जिस माध्यमिक विद्यालय में 100 बच्चे होंगे।
जिला मंडी अध्यक्ष दयाराम ठाकुर ने कहा है कि कला एवं शिल्प अध्यापक और शारीरिक अध्यापको की जरूरत माध्यमिक विद्यालय में जरूरी है क्योंकि माध्यमिक विद्यालयों में वोकेशनल सब्जेक्ट नही होते हैं ।
जबकि राजकीय उच्च विद्यालयों और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में बहुत से वोकेशनल सब्जेक्ट होते हैं । जिसमे कंप्यूटर अध्यापक,माइंड स्पार्क अध्यापक , टूरिज्म,फिजिकल एजुकेशन,हेल्थ,ऑटोमोबाइल और सिक्योरिटी जैसे विषय ड्राइंग विषय के साथ पढ़ाये जाते हैं जबकि माध्यमिक विद्यालयों में इस तरह के वोकेशनल विषय नही पढ़ाये जाते हैं। माध्यमिक विद्यालयों में सिर्फ ड्राइंग विषय ही पढ़ाये जाते है।
इस तरह की अधिसूचना एक बार 5 दिसंबर 2018 को भी जारी हुई थी । जिला मंडी सिएंडबी अध्यापक संघ के अध्यक्ष दया राम ठाकुर ने मुख्यानंत्री और शिक्षा मंत्री से निवेदन किया है कि 19 सितंबर और 5 दिसंबर 2018 की अधिसूचना रद्द की जाए और माध्यमिक विद्यालयों में शारीरिक अध्यापको को यथावत रखा जाए।
जबकि नई एजुकेशन पॉलिसी में शारीरिक अध्यापक और कला अध्यापक माध्यमिक स्कूलों में कक्षा6 से कक्षा 12 तक जरूरी है।कहा की स्कूलों का नया स्कूली पाठ्यक्रम आधुनिकता और भारतीय कला संस्कृति का मिश्रण होगा जहां बच्चो को नई एजुकेशन पालिसी के तहत ड्राइंग विषय कक्षा 1 से कक्षा 12 तक अनिवार्य सब्जेक्ट हैं जहां पर बच्चो को कोडिंग व आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के साथ कला की शिक्षा दी जाएगी। फिलहाल राष्ट्रीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने सभी स्कूलों में 1 से 12वी कक्षा तक कला को अनिवार्य रुप से पढ़ाने की सिफारिश की है इसके लिए सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से काला शिक्षक भी नियुक्त करने का सुझाव दिया है।
एनसीईआरटी के कला एवं सौंदर्य बोध विभाग ने यह सिफारिश ऐसे समय की है जब नए स्कूली पाठ्यक्रम को तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है इस सिफारिश में न सिर्फ कला को एक विषय के रूप में सभी स्कूलों में पढ़ाने की सिफारिश की गई है बल्कि इसके मूल्यांकन को जरूरी बताते हुए परीक्षा परिणाम में इसके अंको को जोड़ने की पैरवी भी की है।
