April 15, 2026
Shimla

कर्मचारियों के डीए और एरियर को बहाने, लेकिन मित्रों के लिए सुक्खू सरकार के खुले खजाने

शिमला: इस समय हिमाचल प्रदेश में खजाने के खस्ताहाल और कर्मचारियों के डीए-एरियर आदि लाभों की अदायगी का मुद्दा चारों तरफ चर्चा में है. इन दिनों विधानसभा का मानसून सेशन चल रहा है. इस बीच, सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अचानक सदन में एक प्रस्ताव लाकर सभी को चौंका दिया. सीएम सुक्खू ने कहा कि राज्य की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए सीएम, मंत्री व सीपीएस सहित निगम-बोर्ड के चेयरमैन अपने दो महीने के वेतन व भत्ते विलंबित यानी डिले करते हैं. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि ये कदम सांकेतिक है और वे सभी विधायकों से भी अपील करते हैं कि इसमें सहयोग करें.

इस बोर्ड चेयरमैन की सैलरी 1 लाख बढ़ा दी

सीएम के इस ऐलान को अभी कुछ ही समय गुजरा था कि शनिवार को सुबह-सवेरे एक नोटिफिकेशन सोशल मीडिया में तैर गई. ये नोटिफिकेशन हिमाचल प्रदेश भवन व सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड (HPBOCWB CHAIRMAN) के चेयरमैन नरदेव कंवर का वेतन सीधे एक लाख रुपए बढ़ाने से जुड़ी थी. बोर्ड के चेयरमैन को पहले 30 हजार मासिक वेतन मिलता था. अब ये बढ़कर सीधा 1.30 लाख रुपए मासिक कर दिया. इसके बाद सोशल मीडिया पर सुखविंदर सिंह सरकार के इस फैसले के खिलाफ तंज कसे जाने लगे. यहां बता दें कि नरदेव कंवर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के बहुत करीबी माने जाते हैं.

भाजपा लगाती रही है मित्रों की सरकार का आरोप

सीएम पर भाजपा पहले भी ये आरोप लगाती आई है कि ये सरकार मित्रों की सरकार है. इस समय राज्य में कैबिनेट रैंक प्राप्त नेताओं में सीएम के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान भी सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के बरसों से करीबी मित्र हैं. इसके अलावा सीएम के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू को भी कैबिनेट रैंक हासिल है. विधायक नंदलाल राज्य योजना आयोग के चेयरमैन हैं और उन्हें भी कैबिनेट रैंक दिया गया है. विधायक आरएस बाली भी पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन के तौर पर कैबिनेट रैंक धारी हैं. अब कामगार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन नरदेव कंवर के वेतन में सीधे एक लाख रुपए बढ़ोतरी की गई है. विडंबना है कि दो दिन पहले सीएम आर्थिक संकट का रोना रोते हैं और फिर अचानक से ये नोटिफिकेशन आ जाती है.

एरियर व डीए को लेकर कर्मचारी आंदोलन पर

हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय कर्मचारी महासंघ ने एरियर व डीए को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. महासंघ के मुखिया संजीव शर्मा का कहना है कि अफसरों व मंत्रियों की ऐश में कोई कमी नहीं है, लेकिन कर्मचारियों को उनके हक के लिए तरसाया जा रहा है. इस बार 15 अगस्त को कर्मचारियों को उम्मीद थी कि कम से कम डीए की चार फीसदी किश्त मिल जाएगी, लेकिन सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य स्तरीय समारोह स्थल देहरा से ऐसी कोई घोषणा नहीं की. उसके बाद कर्मचारियों का आंदोलन चरम पर पहुंच गया. कैबिनेट मंत्री राजेश धर्माणी के एक बयान ने कर्मचारियों के गुस्से को और भड़का दिया. इस समय कर्मचारी काले बिल्ले लगाकर विरोध कर रहे हैं. कर्मचारियों के एरियर व डीए का 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक सरकार पर बकाया है.

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