नहीं पहुंच पाए थे औरंगजेब के करिंंदे और अंग्रेज सिपाही
18 नवंबर 2024 (साभार अनंत ज्ञान जितेंद्र कौशल बैजनाथ)
बड़ा भंगाल का नाम सुनते ही गगनचुंबी देवदार के दरख्त, अपार सौंदर्य से लबालब जल, जंगल और जमीन का अद्भुत नजारा जेहन में एकदम सामने आ जाता है। हो भी क्यों न! कुदरत ने जिला कांगड़ा की इस घाटी को अपार प्राकृतिक सौंदर्य तो बख्शा ही, साथ ही यहां के लगों ने सांस्कृतिक विरासत को भी सहेज कर रखा है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको बैजनाथ के बड़ाग्रां से से 3 दिन तक पैदल चलना पड़ता है। समुद्र तल से तकरीबन 11000 फुट की ऊंचाई पर बसा यह गांव पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला में आता है। बताते हैं कि यह गांव 16वीं शताब्दी में उस समय बसाया गया था औरंगजेब ने जबरन हिंदुओं का धर्मांतरण करना शुरू कर दिया। तब एक समुदाय विशेष ने बहू बेटियों की आबरू और युवाओं की यौवन को बचाने के लिए बड़ा भंगाल की ओर किया। अत्यंत दुर्गम क्षेत्र होने की वजह से यहां तक न तो औरंगजेब के कारिंदे पहुंच पाए और न ही उसके बाद अंग्रेजी हुकूमत के सिपहसालार इस गांव पर कब्जा कर पाए। यूं भी कह सकते हैं कि यह गांव हमेशा ही स्वाभिमान का पर्याय रहा है। यहां कोई भी स्वास्थ्य संस्थान ना होने की वजह से लोग जंगली जड़ी बूटियां से ही अपना इलाज करते हैं। यहां रहने वाले तमाम लोग प्राकृतिक तौर पर उगने वाली सब्जियां और अपने तौर पर राजमा, गेहूं ,मक्की, काला जीरा इत्यादि की पैदावार करते हैं। कालीहनी ग्लेशियर से निकलने वाली जलधारा निचले क्षेत्र में जाकर विशालकाय रावी नदी का रूप धारण कर लेती है। क्योंकि यह नदी कभी पहाड़ी चट्टानों से टकराकर अपना रास्ता बनाती है तो कभी गहरे झरने का रूप धारण कर लेती है। पुरुषत्व की धनी इस नदी को पुर्षणी ने भी कहते हैं जोकि पुरुषों की तरह कभी हार नहीं मानती। यहां के ज्यादातर युवा कामकाज की वजह से निचले क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं जबकि महिलाएं और बुजुर्ग गांव में ही रहना पसंद करते हैं। यही वजह है कि सर्दियों से पहले ज्यादातर युवा बीड़ या चंबा पलायन कर जाते हैं। और गर्मियों में वापस लौट आते हैं। हालांकि बीते वर्ष गांव के तकरीबन 200 घरों के लिए सोलर लाइट और इनवर्टर की सुविधा प्रदान की थी जिस वजह से गांव वासी अब न केवल मोबाइल चार्ज कर सकते हैं बल्कि देश और दुनिया की खबरों से भी रूबरू हो रहे हैं। हालांकि यहां मोबाइल सिग्नल नहीं है मगर सरकार द्वारा उपलब्ध करवाए गए इनवर्टर से यहां के लोग डिश एंटीना केमाध्यम सेे देश और दुनिया से जुड़े रचुके हैं।
बॉक्स लगाए :
बड़ा भंगाल पंचायत प्रधान मंसाराम ने बताया कि इन दिनों थमसर ग्लेशियर में भारी बर्फबारी की वजह से रास्ता नहीं खुल पाया है। इस वजह से वाया चंबा बड़ा भंगाल जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि तमाम विकास कार्य जून जुलाई और सितंबर माह में ही हो पाते हैं।
उपमंडल अधिकारी बैजनाथ दुनीचंद ठाकुर का कहना है कि हालांकि कांगड़ा जिला का यह दुर्गम क्षेत्र है बावजूद इसके प्रशासन और सरकार की ओर से यहां सुविधा मुहैया करवाने के प्रयास किया जा रहे हैं। बीते वर्ष गांव के लोगों की सुविधा के लिए तत्कालीन जिलाधीश निपुण जनरल द्वारा सेटेलाइट फोन उपलब्ध कराया गया है। बीएसएनएल दवारा टावर लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है तथा शीघ्र ही टावर लगा दिया जाएगा। सड़क का काम भी वाया चंबा चल रहा है। ग्रामीणों की सुविधा के लिए घर द्वार पर राशन पहुंचाया जाता है।
