शिमला: भारतीय सेना के लिए लेह-लद्दाख तक पहुंचने का मार्ग सुगम होने की उम्मीद बलवती हो गई है. पठानकोट में भारतीय सेना का लॉजिस्टिक हब है. यहां से लेह-लद्दाख तक सेना के काफिले और सामान जाता है. सेना के लिए लेह-लद्दाख तक पहुंचना बिल्कुल सहज और आसान हो जाएगा, यदि भुभू जोत टनल बन जाए और साथ ही नेशनल हाईवे भी. ये नेशनल हाईवे घटासनी-शिलह बधानी-भुभू जोत-कुल्लू के रूप में होगा तो सुख भरी खबर ये है कि इस हाईवे व भुभू जोत टनल के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने एक तरह से हामी भर दी है.
उल्लेखनीय है कि ये मामला पिछले कई साल से चल रहा है. पूर्व में वीरभद्र सिंह सरकार के समय हिमाचल में स्वास्थ्य मंत्री का कार्यभार देख रहे कौल सिंह ठाकुर ने फरवरी 2015 में केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से इस टनल के निर्माण को लेकर दिल्ली में मुलाकात की थी. हाल ही में मौजूदा सुखविंदर सिंह सरकार के मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी नितिन गडकरी से मिल कर इसी मामले को उठा चुके हैं. खुद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसी प्रोजेक्ट को लेकर नितिन गडकरी के साथ-साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी.
इससे पूर्व मंडी से भाजपा के सांसद स्व. रामस्वरूप शर्मा भी अपने स्तर पर प्रयासरत रहे. ऐसे में सामूहिक प्रयासों से ये नेशनल हाईवे और भुभू जोत टनल के निर्माण को लेकर आखिरकार रक्षा मंत्रालय ने भी हामी भर दी है. इससे पूर्व भारतीय सेना ने भी अपने सुझाव रक्षा मंत्रालय को दिए थे. सेना ने भी ये बात रखी थी कि उसके काफिले को ब्यास नदी के किनारे से गुजरने में जोखिम उठाना पड़ता है और बरसात में सड़क मार्ग अवरुद्ध हो जाता है. ऐसे में घटासनी-शिलह बधानी-भुभू जोत-कुल्लू नेशनल हाईवे बनने और टनल का निर्माण होने से न केवल मार्ग कम हो जाएगा, बल्कि ये सुरक्षित भी होगा.
अक्टूबर में रक्षा मंत्री से मिले थे सीएम सुखविंदर सिंह
सामरिक महत्व के इस प्रोजेक्ट को लेकर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 25 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात की थी. इस मुलाकात में सीएम सुक्खू ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक आग्रह पत्र दिया था. सीएम ने कहा था कि पठानकोट में भारतीय सेना का लॉजिस्टिक व लांचिंग हब है. वहां से लेह-लद्दाख तक जाने के लिए पठानकोट से मंडी व फिर कुल्लू वाले सडक़ मार्ग का प्रयोग होता है. चूंकि ये सड़क ब्यास नदी के किनारे-किनारे है, लिहाजा बरसात में यहां जोखिम रहता है. वैसे भी नदी किनारे के सड़क मार्ग सेना के भारी-भरकम काफिलों के लिए कठिन व जटिल नेचर के होते हैं. सीएम सुक्खू का कहना था कि यदि घटासनी-शिलह बधानी-भुभू जोत-कुल्लू नेशनल हाईवे बनता है और भुभू जोत टनल का निर्माण होता है तो इससे पठानकोट से कुल्लू के बीच की दूरी कम से कम साठ किलोमीटर कम हो जाएगी. इसी सड़क पर भुभू जोत के पास टनल बन जाएगी तो भारतीय सेना के लिए ये बड़ी आसानी होगी.
केंद्र के दो मंत्रालयों की भूमिका
सामरिक महत्व वाले इस नेशनल हाईवे व टनल को लेकर केंद्र के दो बड़े मंत्रालयों की भूमिका है. एक मंत्रालय नितिन गडकरी के नेतृत्व वाला भूतल परिवहन है और दूसरा केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का मंत्रालय. सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अक्टूबर महीने के दौरे में दोनों ही मंत्रियों से मुलाकात की है. सीएम ने पहले नितिन गडकरी से चर्चा की और कहा कि घटासनी-शिलह बधानी-भुभू जोत-कुल्लू के मध्य एक नेशनल हाईवे समय की जरूरत है. चूंकि केंद्र सरकार ने नए नेशनल हाईवे की मंजूरी पर रोक लगाई है, लेकिन सामरिक महत्व वाले प्रोजेक्ट इस रोक से बाहर हैं.
ऐसे में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर उन्हें उपरोक्त हाईवे का सामरिक महत्व बताकर समर्थन मांगा कि वो भूतल परिवहन मंत्रालय से सिफारिश करें. पक्की सूचना है कि अब रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को लेकर हामी भरी है. दोनों केंद्रीय मंत्रालय भी सामरिक महत्व के इस प्रोजेक्ट को लेकर सहमत हैं कि ये सेना की जरूरत है. इससे न केवल भारतीय सेना को सुगम मार्ग मिलेगा, बल्कि कुल्लू-मंडी व साथ लगते इलाकों को भी सौगात मिलेगी.
क्या है हिमाचल की राय
हिमाचल सरकार चाहती है कि जोगेंद्र नगर से कुल्लू के लिए मंडी को बाईपास करने में सक्षम एक नया हाईवे बने। ये प्रोजेक्ट लंबे अरसे से प्रस्तावित है. वीरभद्र सिंह सरकार से लेकर जयराम सरकार व वर्तमान सरकार इसके लिए प्रयास करती रही है. हिमाचल चाहता है कि जोगेंद्र नगर से आगे चलकर घटासनी में नेशनल हाईवे-20 से नया प्रोजेक्ट आरंभ किया जाए. फिर ये मंडी को बाईपास कर देगा, साथ ही भारतीय सेना को लेह जाने के लिए ब्यास नदी के किनारे वाले मार्ग से निजात मिल जाएगी. इससे पठानकोट से कुल्लू के बीच साठ किलोमीटर का सफर कम हो जाएगा.
2023 में भी सीएम ने उठाया था मसला
वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश को बरसात ने भारी नुकसान पहुंचाया था. तब 500 से अधिक लोग काल का शिकार हुए थे और 10 हजार करोड़ की संपत्ति तबाह हो गई थी. उस समय 30 अगस्त 2023 को पीएमओ को निर्देश पर हिमाचल की सड़कों को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की टीम आई थी. उस टीम के समक्ष सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा था कि कांगड़ा और कुल्लू घाटी को जोड़ने के लिए घटासनी-शिलह-बधानी हाईवे व भुभू जोत सुरंग का निर्माण किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि यह सुरंग न केवल पर्यटन के लिहाज से वरदान होगी, बल्कि भारतीय सेना के लिए भी सामरिक महत्व की साबित होगी. यही टनल कांगड़ा से मनाली के बीच की दूरी लगभग 55 किलोमीटर कम कर देगी. साथ ही पठानकोट से कुल्लू के बीच की दूरी 60 किलोमीटर कम हो जाएगी.
कुल्लू जिला से संबंध रखने वाले भारतीय सेना के रिटायर्ड ऑफिसर सूबेदार मेजर मेहरसिंह चौहान का कहना है कि भुभू जोत टनल से देश की सेना को बहुत लाभ मिलेगा. सूबेदार मेजर मेहर सिंह चौहान ने कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया है. वे चीन से लगने वाली सीमा की संवेदनशीलता पर अध्ययन कर चुके हैं. उनका कहना है कि केंद्र सरकार व रक्षा मंत्रालय ऐसे मामलों में भारतीय सेना की जरूरतों को समझते हैं और इस तरह के प्रोजेक्ट के निर्माण में तत्परता दिखाते हैं.
