July 21, 2026
Shimla

Panchayat Election: मतदाता सूचियों की छपाई अटकी, हिमाचल में पंचायत चुनाव अब अप्रैल–मई तक टलने के आसार

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश सरकार के बीच जारी विवाद गहराता जा रहा है। इसी खींचतान के बीच मतदाता सूचियों की छपाई का काम पूरी तरह रुक गया है, जिससे पंचायत चुनावों की तैयारी ठप पड़ गई है।

डेटा न मिलने से छपाई रुकी

मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग ने मतदाता सूचियों की छपाई के टेंडर जारी कर दिए थे, लेकिन जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा आवश्यक डाटा उपलब्ध न करवाने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। रोस्टर जारी होने से पहले इन सूचियों को पंचायतों तक भेजना आवश्यक है, और प्रत्येक वार्ड के लिए 20 प्रतियां मुद्रित की जानी थीं।

आयोग और सरकार के आदेशों में टकराव

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनावी सामग्री—मतदाता सूची, बैलेट पेपर आदि—उठाने के निर्देश जारी किए गए हैं, जबकि सरकार की ओर से प्रदेश में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू है। इन परस्पर विरोधी स्थितियों के कारण जिला निर्वाचन अधिकारी यह समझ नहीं पा रहे कि किस आदेश का पालन करें। दो उपायुक्तों ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मांगे हैं।

पुनर्गठन पर रोक हटाने को आयोग तैयार नहीं

पंचायतों के पुनर्गठन पर लगी रोक को हटाने की सरकार की मांग को भी आयोग ने खारिज कर दिया है। सरकार नेモデル कोड ऑफ कंडक्ट के क्लॉज 12.1 को हटाने का आग्रह किया है, लेकिन आयोग का कहना है कि यह मसला केवल अदालत में ही स्पष्ट हो सकता है।

चुनाव अब अप्रैल–मई में होने की संभावना

कर्मचारियों और सरकारी मशीनरी के बिना चुनाव कराना मुश्किल है, यह बात आयोग भी स्वीकार कर रहा है। हिमाचल में पंचायत चुनावों में अधिकांश ड्यूटियां शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और अध्यापकों को दी जाती हैं। दिसंबर–जनवरी में बर्फबारी और उसके बाद स्कूल परीक्षाओं को देखते हुए चुनावों को आगे बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि अब चुनाव अगले वर्ष अप्रैल–मई 2026 तक टल जाएं।

पंचायती शक्तियां बीडीओ और सचिव को मिलने की तैयारी

पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी 2026 में पूरा हो रहा है। अगर चुनाव में विलंब होता है, तो पंचायतों की प्रशासनिक शक्तियां बीडीओ और पंचायत सचिव को सौंपे जाने की संभावना है। विकास कार्यों की निगरानी और अन्य प्रशासनिक दायित्व भी इन्हीं अधिकारियों के पास चले जाएंगे।

हिमाचल में पंचायत चुनावों को लेकर बनी अस्पष्टता और प्रशासनिक खींचतान के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सभी की निगाहें सरकार और आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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