25.6 C
Baijnath
October 1, 2026
Palampur

कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण

प्राकृतिक खेती की बारीकियों को लगन से सीखें वैज्ञानिक: डा.तेज प्रताप

प्राकृतिक खेती वर्तमान समय का बहुत महत्वपूर्ण मुद्दाः कुलपति डा.डी.के.वत्स

पालमपुर 14 सितंबर। चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में गुरुवार को प्राकृतिक खेती की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण का उद्घाटन किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व कुलपति डा. तेज प्रताप ने कहा कि प्रशिक्षुओं को प्राकृतिक खेती के महत्व और उपयोग के बारे में स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने प्रशिक्षुओं से प्राकृतिक खेती की बारीकियों को लगन से सीखने को कहा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और शून्य बजट प्राकृतिक खेती जैसे शब्द प्रारंभिक चरण में भ्रमित करने वाले रहे है। अब, स्थिति अलग है क्योंकि लोग सुरक्षित भोजन के उपभोग और खेती के बारे में चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए गहन शोध और उन्नत तकनीक की आवश्यकता है और मानव और पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी यह अच्छा है। डा. तेजप्रताप ने प्रशिक्षुओं से प्राकृतिक खेती के चार सिद्धांतों को अपनाने के लिए कहा।

अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति डा.डी.के.वत्स ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय का बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। उन्होंने उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मृदा स्वास्थ्य में गिरावट की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि खेती में देसी खाद के उपयोग में कमी आई है और प्राकृतिक खेती में पैकेज ऑफ प्रैक्टिस के साथ टिकाऊ कृषि के लिए वैज्ञानिकों को ऐसे मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कुलपति ने रोग और कीट प्रबंधन में रसायनों का उपयोग कम करने पर भी चर्चा की क्योंकि यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कृषि को आधुनिक बनाने की आवश्यकता पर भी बात की ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन के उपयोग आदि का उपयोग करके युवा पीढ़ी इस ओर आकर्षित होगी।

अनुसंधान निदेशक डा. एस.पी.दीक्षित ने कहा कि फसलों, विशेषकर सब्जियों में कीटनाशकों का उपयोग चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। अब समय आ गया है कि सभी संबंधित लोगों को प्राकृतिक खेती को लोकप्रिय बनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

पाठ्यक्रम निदेशक और विभागाध्यक्ष डॉ. जनार्दन सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में महाराष्ट्र, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से 26 वैज्ञानिक शामिल हो रहे हैं। देश के शीर्ष संस्थानों के विशेषज्ञ चौदह दिनों के प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत करेंगे। वे प्राकृतिक खेती के सभी पहलुओं पर बात करेंगे। प्रधान अन्वेषक डा. रणबीर सिंह राणा ने बताया कि मेजबान विश्वविद्यालय में संरक्षित कृषि एवं प्राकृतिक खेती पर उन्नत कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र तथा जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग द्वारा संयुक्त रूप से प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। उद्घाटन सत्र में डा. राकेश चौहान ने भी अपने विचार व्यक्त किये। समारोह के दौरान संविधिक अधिकारी, विभागाध्यक्ष और वैज्ञानिक भी मौजूद रहे।

Related posts

प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा गोपालपुर चिड़ियाघर को बंद करने का निर्णय कांग्रेस सरकार की अदूरदर्शिता को दर्शाता है-संजय सोनी

Admin

नई में महात्मा गांधी व श्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर ‘पुष्प श्रद्धांजलि समारोह’ में कृषि विश्विद्यालय के विद्यार्थी

Admin

ISKCON PALAMPUR: पालमपुर में इस्कॉन मंदिर की नींव: डॉ. अमित गुलेरिया की प्रेरणा से शुरू हुआ आध्यात्मिक युग

Admin

Leave a Comment