हिमाचल प्रदेश के गुड़िया रेप और मर्डर केस से जुड़े पुलिस कस्टडी में हत्या के मामले में आज चंडीगढ़ की CBI कोर्ट 8 पुलिस अधिकारियों को सजा सुनाएगी। इस मामले में पहले ही कोर्ट ने इन सभी को दोषी करार दिया था। दोषियों में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिस विभाग के अन्य बड़े अफसर शामिल हैं।
दरअसल, साल 2017 में हिमाचल प्रदेश के शिमला के कोटखाई इलाके में 16 वर्षीय गुड़िया का रेप और मर्डर हुआ था। इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। पुलिस ने इस मामले में सूरजनाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसकी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई।
पुलिस कस्टडी में आरोपी सूरज की मौत
पुलिस ने सूरज की हत्या का आरोप एक अन्य आरोपी राजू पर लगाया। सूरज की कस्टडी में मौत के बाद जनता का गुस्सा फूट पड़ा, और भीड़ ने कोटखाई पुलिस थाने को जलाने की कोशिश की। इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने केस की जांच सीबीआई को सौंप दी।
CBI की जांच में क्या निकला?
सीबीआई ने अपनी जांच में पाया कि सूरज की मौत पुलिस टॉर्चरके कारण हुई थी। सूरज के शरीर पर 20 से ज्यादा चोटों के निशान पाए गए, और AIIMS के डॉक्टरों की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि उसे पुलिस ने पूछताछ के दौरान गंभीर यातनाएं दी थीं।
CBI ने 9 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया, जिनमें शामिल थे…
आईजी जहूर जैदी
डीएसपी मनोज जोशी
एसआई राजिंदर सिंह
एएसआई दीप चंद शर्मा
हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह और रफी मोहम्मद
कांस्टेबल रानित सटेटा
हालांकि, शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया गया।
क्या थे आरोप?
CBI ने दोषियों पर हत्या (धारा 302), सबूत मिटाने और यातना देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सूरज की मौत पुलिस अधिकारियों की पिटाई से हुई थी।
आज क्या होगा?
CBI कोर्ट आज इन सभी दोषी अधिकारियों की सजा का ऐलान करेगी।
इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित मामले में न्याय की उम्मीद की जा रही है। यह फैसला उन लोगों के लिए भी एक मिसाल बनेगा, जो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं।
दोषी अधिकारी कौन हैं?
आईजी जहूर जैदी:1994 बैच के आईपीएस अधिकारी।
डीएसपी मनोज जोशी
एसआई राजिंदर सिंह
एएसआई दीप चंद शर्मा
हेड कांस्टेबल मोहन लाल
सूरत सिंह
रफी मोहम्मद
कांस्टेबल रानित सटेटा
जनता का गुस्सा और प्रभाव
गुड़िया केस ने हिमाचल प्रदेश में जनता को झकझोर कर रख दिया। पुलिस द्वारा किए गए टॉर्चर और सूरज की मौत ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। कोटखाई थाने को जलाने की घटना से साफ हो गया कि जनता पुलिस की कार्रवाई से कितनी नाराज थी।
CBI कोर्ट का आज का फैसला भारत में न्याय और पुलिस जवाबदेही का एक महत्वपूर्ण उदाहरण होगा। दोषी पुलिस अधिकारियों को मिलने वाली सजा न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद होगी, बल्कि यह दिखाएगी कि कानून के सामने कोई भी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली हो, बच नहीं सकता।
