दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 27 साल बाद स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, भाजपा अब तक 40 सीटें जीत चुकी है और 8 सीटों पर आगे है, जिससे उसका कुल आंकड़ा 48 तक पहुंच गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने 18 सीटें जीती हैं और 4 सीटों पर आगे है, यानी उसका कुल स्कोर 22 तक सिमट गया है. कांग्रेस का इस चुनाव में पूरी तरह सफाया हो गया और उसे एक भी सीट नहीं मिली.
भाजपा ने इससे पहले 1993 में दो-तिहाई बहुमत के साथ 53 सीटें जीती थीं, जिसके बाद मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज मुख्यमंत्री बने थे. इस बार भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने दिल्ली की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, जहां 2013 से लगातार शासन कर रही आम आदमी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई है.
यह विकास और सुशासन की जीत: पीएम मोदी
दिल्ली में भाजपा की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जनशक्ति सर्वोपरि है! यह विकास और सुशासन की जीत है. मैं दिल्ली के भाइयों और बहनों को इस ऐतिहासिक जनादेश के लिए नमन करता हूं. हम दिल्ली के विकास और जनता के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.” इस बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम 5:30 बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. उनके इस संबोधन में आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है.
केजरीवाल और सिसोदिया की करारी हार
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपनी परंपरागत नई दिल्ली सीट से हार गए हैं. उन्हें भाजपा के प्रवेश वर्मा ने 4,089 वोटों के अंतर से हराया. उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया भी अपनी जंगपुरा सीट नहीं बचा सके. इसके अलावा, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन भी चुनाव हार गए हैं. हालांकि, आतिशी ने कालकाजी सीट से जीत हासिल कर ली है. चुनावी नतीजों के बाद अरविंद केजरीवाल ने हार स्वीकार करते हुए कहा, “हमें जनता का फैसला स्वीकार है. भाजपा को इस जीत की बधाई देता हूं. हमने दिल्ली की सेवा के लिए ईमानदारी से काम किया, लेकिन जनता ने इस बार भाजपा पर भरोसा जताया है.”
दिल्ली सचिवालय को सील करने का आदेश
चुनावी नतीजों के बाद दिल्ली सरकार के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) ने सचिवालय को सील करने का आदेश जारी किया. आदेश में कहा गया कि बिना परमिशन के कोई भी फाइल, दस्तावेज या कंप्यूटर हार्डवेयर सचिवालय परिसर से बाहर नहीं ले जाया जा सकता.
चुनाव में मतदान और सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली में भाजपा की इस जीत से राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ेगा. 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को दिल्ली में हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में शानदार वापसी करके उसने अपना दबदबा फिर से कायम कर लिया है. आने वाले समय में भाजपा की सरकार किस तरह दिल्ली का विकास करती है, यह देखने वाली बात होगी. गौरतलब हो कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को मतदान हुआ था, जिसमें 70 सीटों पर 60.44% मतदान दर्ज किया गया. कुल 1.55 करोड़ मतदाताओं में 83.76 लाख पुरुष, 72.36 लाख महिलाएं और 1,267 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल थे. पूरे चुनाव में 42,000 दिल्ली पुलिस कर्मी और केंद्रीय बल की 220 कंपनियां सुरक्षा में तैनात थीं.
भाजपा की प्रचंड जीत ने चौंकाया
- मोदी सरकार की लोकप्रियता – केंद्र सरकार की नीतियों और विकास कार्यों का दिल्ली के मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा.
- केजरीवाल सरकार के खिलाफ असंतोष – जनता ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की नीतियों और कार्यशैली से नाराजगी जताई.
- भाजपा का मजबूत चुनाव प्रचार – भाजपा ने इस बार आक्रामक प्रचार अभियान चलाया और दिल्ली के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफल रही.
दिलचस्प चुनावी आंकड़े
2020 में भाजपा ने सिर्फ 8 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार उसने 6 गुना ज्यादा यानी 48 सीटों पर जीत दर्ज की.
नई दिल्ली सीट पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ 20 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.
कांग्रेस के 70 में से 68 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.
भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों ने जीत दर्ज की – प्रवेश वर्मा (नई दिल्ली) और हरीश खुराना (मोती नगर).
