हिमाचल प्रदेश के जवाली विधानसभा क्षेत्र की अमलेला पंचायत का लाल अनिकेत कैंसर से लड़ते-लड़ते अपनी जिंदगी की जंग हार गया। महज 25 साल की उम्र में देश की सेवा का सपना देखने वाला यह वीर जवान तिरंगे में लिपटकर घर लौटा, तो पूरे गांव में मातम छा गया। माता-पिता, बहन और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
अनिकेत का जन्म 2000 में अमलेला निवासी राकेश कुमार और नीलम के घर हुआ था। बचपन से ही देशभक्ति उसके रग-रग में थी। वर्ष 2022 में वह 21 डोगरा रेजिमेंट में सिपाही के रूप में भर्ती हुआ और लेह-लद्दाख में तैनात था। लेकिन कुछ समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और जांच में कैंसर का पता चला। पिछले आठ महीनों से दिल्ली के आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन छह मार्च की रात उसने अंतिम सांस ली।
शुक्रवार को जब अनिकेत की पार्थिव देह घर पहुंची, तो पूरा गांव गमगीन हो गया। हर तरफ चीख-पुकार मच गई, मां की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे और बहन आकांक्षा बेसुध थी। आर्मी की टुकड़ी ने उसे अंतिम सलामी दी, और भारी मन से बहन ने अपने वीर भाई को मुखाग्नि दी।
तहसीलदार नगरोटा सूरियां शिखा, भाजपा नेता संजय गुलेरिया, पूर्व प्रधान प्रभात सिंह सहित सैकड़ों लोगों ने शहीद की अंतिम यात्रा में भाग लिया। अनिकेत का जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वह हमेशा देशभक्ति और बलिदान की मिसाल बना रहेगा।
