नौहराधार (सिरमौर), 21 अप्रैल 2025: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार (11,965 फीट) पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब 1 मई 2025 से प्रवेश शुल्क देना होगा। चूड़धार वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी और ईको डेवलपमेंट कमेटी (ईडीसी) ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। शुल्क की 10 अलग-अलग कैटेगरी बनाई गई हैं, और इसके लिए परमिट के रूप में रसीदें भी जारी की जाएंगी।

शुल्क संरचना और कैटेगरी
चूड़धार, जो शिरगुल महादेव के पवित्र धार्मिक स्थल के लिए प्रसिद्ध है, एक वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र है। ईडीसी और वन्य जीव विभाग ने हाल ही में बैठक कर शुल्क दरें निर्धारित की हैं। शुल्क की कैटेगरी इस प्रकार हैं:
- हिमाचली यात्री: प्रति व्यक्ति 20 रुपये
- गैर-हिमाचली यात्री: प्रति व्यक्ति 50 रुपये
- विदेशी यात्री: प्रति व्यक्ति 200 रुपये
- ट्रैकर, हाइकर्स और कैंपर्स: प्रति व्यक्ति 100 रुपये
- कैमरा शुल्क (फोन कैमरा को छोड़कर): 50 से 100 रुपये
- मूवी/डॉक्यूमेंट्री शूटिंग: 10,000 से 15,000 रुपये प्रतिदिन
- शादी की शूटिंग: 3,000 रुपये प्रतिदिन
- टेंटिंग (भारतीय नागरिक): 200, 300, और 400 रुपये प्रति टेंट/दिन
- टेंटिंग (विदेशी नागरिक): 500 रुपये प्रति टेंट/दिन
- खच्चर/घोड़े से यात्रा: 100 रुपये प्रति जानवर
सिरमौर, सोलन, और शिमला जिले के यात्रियों के लिए शुल्क स्वैच्छिक होगा, लेकिन इसमें टेंटिंग शुल्क शामिल नहीं है। जातर (सामूहिक धार्मिक यात्रा) पर जाने वालों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
शुल्क संग्रह की व्यवस्था
शुल्क संग्रह के लिए चूड़धार के सभी रास्तों पर गुमटियां बनाई जाएंगी। नौहराधार के रास्ते पर जमनाला और पुलवाहल के रास्ते पर खड़ाच में शुल्क काउंटर स्थापित होंगे। यह कार्य सिरमौर जिले की देवना, छोगटाली, और नौहराधार पंचायतों के साथ-साथ शिमला जिले की सराहन, जोड़ना, और जवग छमरोग पंचायतों के नवयुवक मंडलों को सौंपा गया है।
- शुल्क का बंटवारा: कुल शुल्क का 75% सरकार के खाते में जमा होगा, जबकि 25% नवयुवक मंडलों के युवाओं को मिलेगा।
परमिट और उद्देश्य
चूड़धार वन्य जीव अभयारण्य में प्रवेश के लिए यात्रियों को एक परमिट लेना होगा, जिसके लिए रसीदें प्रकाशित की गई हैं। ईडीसी का कहना है कि यह शुल्क पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए लगाया जा रहा है। इन दरों को अंतिम मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
सोशल मीडिया पर चर्चा
चूड़धार यात्रा पर शुल्क लगाने का निर्णय सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इस कदम को पर्यावरण संरक्षण के लिए सही मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे धार्मिक स्थल पर अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “शुल्क ज्यादा नहीं है, लेकिन इस राशि का सही उपयोग होगा, इसकी गारंटी कौन देगा?”
चूड़धार का महत्व
चूड़धार, जिसे चूरचांदनी (बर्फ की चूड़ी) भी कहा जाता है, सिरमौर जिले की सबसे ऊंची चोटी और बाहरी हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यह श्री शिरगुल महाराज (चूरेश्वर महाराज) का पवित्र स्थल है, जिसकी पूजा सिरमौर, शिमला, चौपाल, सोलन, और उत्तराखंड के देहरादून में की जाती है। चोटी से गंगा के मैदान, सतलुज नदी, और बद्रीनाथ-केदारनाथ की चोटियों का मनोरम दृश्य दिखता है। यहाँ हिमालयन ब्लैक बेयर, मस्क डियर, और मोनाल जैसे वन्य जीव भी पाए जाते हैं।

यात्रियों के लिए सलाह
यात्री नौहराधार (14 किमी) या सराहन, चौपाल (8 किमी) के रास्ते चूड़धार पहुँच सकते हैं। शुल्क लागू होने से पहले अपनी यात्रा की योजना बनाएँ और परमिट के लिए तैयार रहें। सर्दियों में बर्फबारी के कारण यह क्षेत्र बंद रहता है, इसलिए गर्मी (अप्रैल-जून) और शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर) में यात्रा करना सबसे उपयुक्त है।
स्रोत: सोशल मीडिया पोस्ट, चूड़धार वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी, और ईको डेवलपमेंट कमेटी के निर्णय के आधार पर।
