बैजनाथ, 20 जुलाई 2025 (साभार जितेंद्र कौशल, अनंत ज्ञान)
बैजनाथ के उपमंडल स्तरीय सिविल अस्पताल में मरीजों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब एकमात्र मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. अक्षय शर्मा को अचानक वीआईपी ड्यूटी पर भेज दिया गया। डॉ. अक्षय के कमरे के बाहर 50 से अधिक मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इलाज के बिना ही लौटना पड़ा।
मरीजों ने बताया कि वे वर्षों से डॉ. अक्षय शर्मा के पास इलाज करवाते आ रहे हैं और डॉक्टर हमेशा अंतिम मरीज की जांच किए बिना नहीं जाते। मरीजों ने कहा, “हम शाम को ही डॉ. अक्षय के पास आते हैं, लेकिन आज उन्हें वीआईपी ड्यूटी के लिए बुला लिया गया, जिससे हमें बिना इलाज लौटना पड़ रहा है।”
जब इस मामले की जानकारी स्थानीय विधायक किशोरी लाल को मिली, तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने सीएमओ धर्मशाला को फोन कर निर्देश दिए कि भविष्य में पूरे जिले का रोस्टर बनाया जाए और उसी के अनुसार वीआईपी ड्यूटी के लिए डॉक्टरों की तैनाती हो। विधायक ने कहा, “बैजनाथ एक दुर्गम क्षेत्र है। यहां से बार-बार डॉक्टरों को वीआईपी ड्यूटी पर भेजने से परहेज किया जाए। जहां वीआईपी का दौरा हो, वहां से नजदीकी डॉक्टर को तैनात किया जाए।”
स्थानीय लोगों ने भी विधायक के इस कदम का समर्थन किया। उन्होंने मांग की कि जिले का एक व्यवस्थित रोस्टर बनाया जाए, ताकि मरीजों को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े। लोगों ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में वीआईपी दौरों के दौरान बार-बार डॉ. अक्षय शर्मा को ही ड्यूटी पर भेजा जा रहा है, जबकि नजदीकी टांडा मेडिकल कॉलेज में कई एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ और अंतिम वर्ष के प्रशिक्षु डॉक्टर उपलब्ध हैं।
लोगों ने सुझाव दिया कि टांडा मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरों की तैनाती वीआईपी ड्यूटी के लिए की जाए, ताकि बैजनाथ जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर प्रबंधन और समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।
