चंबा, 30 अगस्त 2025: मणिमहेश यात्रा के दौरान भारी बारिश और भूस्खलन के कारण मार्ग अवरुद्ध होने से फंसे लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी के लिए चंबा प्रशासन ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किए हैं। प्रशासन और सेक्टर अधिकारियों की अगुवाई में श्रद्धालु भरमौर से पैदल चलकर चंबा से 15 किलोमीटर दूर कलसुईं सुरक्षित पहुंच गए हैं।
कलसुईं पहुंचने पर श्रद्धालुओं की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशासन ने त्वरित कदम उठाए। चंबा और नूरपुर ले जाने के लिए 39 बसें और 25 टैक्सियां तैनात की गई हैं। बढ़ते दबाव को देखते हुए डीसी कांगड़ा से 40 अतिरिक्त बसों की मांग भी की गई है। इसके अलावा, चंबा मुख्यालय में एक हजार श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है।
कलसुईं, धरवाला और डखोग में तीन निःशुल्क लंगर चलाए जा रहे हैं, जहां श्रद्धालुओं को भोजन, चाय और अन्य आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कलसुईं से राख तक का मार्ग मलबा हटाकर साफ कर दिया गया है, लेकिन यह अभी बसों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।
राहत कार्यों के लिए सात टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें आपदा मित्र, होमगार्ड जवान, एनसीसी कैडेट, स्थानीय स्वयंसेवक, पुलिस कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। ये टीमें श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने और राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।
मंडलायुक्त कांगड़ा ने हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को स्थिति रिपोर्ट भेजकर बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जरूरत पड़ने पर हवाई मार्ग से भी राहत पहुंचाने की तैयारी है। भारी बारिश के कारण चंबा-पठानकोट मार्ग पर भूस्खलन से यातायात बंद है, जिसे सुबह 8 बजे तक बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है।
अतिरिक्त उपायुक्त चंबा, अमित मेहरा ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। यह संकट स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है, जो 1995 की रावी नदी की भयावह आपदा की याद दिलाता है। प्रशासन के त्वरित प्रयासों ने श्रद्धालुओं को राहत और उम्मीद दी है।
