September 16, 2026
Baijnath

Baijnath News: बैजनाथ में अब विसर्जन नहीं! बैजनाथ में गणेश उत्सव का ऐसा निर्णय पहली बार।जानिये क्या है इसके पीछे की वजह?

बैजनाथ, (वीर खड़का ) 2 सितंबर 2025:

बैजनाथ गणेश उत्सव समिति ने इस वर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर एक अनूठा और पर्यावरण हितैषी निर्णय लिया है, जिसकी चारों ओर सराहना हो रही है। समिति ने घोषणा की है कि हर वर्ष गणेश उत्सव का भव्य आयोजन तो किया जाएगा, लेकिन गणपति की मूर्ति का विसर्जन नहीं होगा। इसके बजाय, अष्ट धातु (आठ धातुओं से निर्मित) की बनी गणेश मूर्ति को उत्सव के समापन के बाद मंदिर में स्थायी रूप से स्थापित किया जाएगा।

इस निर्णय की अगुवाई समिति के प्रधान मनोज कपूर और उनकी समर्पित टीम ने की है। यह कदम न केवल धार्मिक परंपराओं का सम्मान करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देता है, जो हिमाचल प्रदेश जैसे पर्यावरण-संवेदनशील राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पहल से नदियों और जलाशयों में होने वाले प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी, जो प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के विसर्जन से उत्पन्न होता है।

समिति के प्रधान मनोज कपूर ने कहा, “हमारा उद्देश्य भगवान गणेश की भक्ति को बनाए रखते हुए प्रकृति की रक्षा करना है। अष्ट धातु की मूर्ति न केवल टिकाऊ है, बल्कि यह हमारी आस्था का स्थायी प्रतीक बनेगी। गणपति बप्पा को मंदिर में स्थापित करके हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हमारी परंपराएँ पर्यावरण के साथ सामंजस्य में हो सकती हैं।” इस निर्णय को स्थानीय लोगों, भक्तों और श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ समर्थन दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस कदम की प्रशंसा हो रही है।

पर्यावरण और परंपरा का अनूठा संगम: हिमाचल प्रदेश में गणेश विसर्जन को लेकर चल रही बहस के बीच, बैजनाथ गणेश उत्सव समिति का यह कदम एक मिसाल बन सकता है। हिमाचल हाई कोर्ट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इको-फ्रेंडली मूर्तियों और कृत्रिम टैंकों के उपयोग की सिफारिशों के अनुरूप, यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देता है। अष्ट धातु की मूर्ति का उपयोग न केवल टिकाऊ है, बल्कि यह धार्मिक स्थल को और पवित्र बनाएगा।

आयोजन की योजना: समिति ने बताया कि इस वर्ष गणेश उत्सव 27 अगस्त से शुरू हुआ था और दस दिनों तक भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। उत्सव के दौरान भजन, कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और महाआरती का आयोजन किया गया। उत्सव के समापन पर गणपति की अष्ट धातु मूर्ति को बैजनाथ के एक मंदिर में विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाएगा, जो भविष्य में भक्तों के लिए दर्शन का केंद्र बनेगी।

सामुदायिक प्रतिक्रिया: स्थानीय समुदाय ने इस पहल को “पर्यावरण और आस्था का सुंदर मेल” करार दिया है। सोशल मीडिया पर #BaijnathGaneshUtsav और #EcoFriendlyGanesh जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग इस निर्णय को अन्य गणेश उत्सव समितियों के लिए प्रेरणा मान रहे हैं।

बैजनाथ गणेश उत्सव समिति की इस पहल को देखते हुए अन्य समितियाँ भी इको-फ्रेंडली और स्थायी पूजा पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। यह कदम न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत रखता है, बल्कि हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को संरक्षित करने में भी योगदान देता है।

(यह जानकारी संदीप चौधरी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म में साझा की।)

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