हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की गगल पंचायत में 26 परिवारों के अवैध पंजीकरण का बड़ा खुलासा हुआ है। इन परिवारों का पंजीकरण अन्य राज्यों के निवासी होने के बावजूद पिछले 10-15 वर्षों से परिवार रजिस्टर में किया गया था। इस गड़बड़झाले के जरिए इन परिवारों ने फर्जी वोट बनवाकर पेंशन, सस्ते राशन समेत विभिन्न लाभ उठाए हैं। लगभग 120 सदस्य इस धोखाधड़ी में संलिप्त हैं, जो आगामी पंचायत चुनाव में फर्जी वोटिंग कर सकते हैं।
यह मामला पंचायत चुनाव से ठीक पहले सामने आया है, जिससे पंचायत प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। गगल पंचायत के प्रधान रेनू पठानिया और उपप्रधान भुवनेश चड्ढा ने मामले की शिकायत विकास खंड अधिकारी (BDO) धर्मशाला के समक्ष लिखित रूप से की है और उन्होंने शीघ्र जांच की मांग की है। बीडीओ ने 15 सितंबर से पहले मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है।
जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है, और कई पहलुओं पर जांच प्रगति पर है। लोगों के बयान लिए जा रहे हैं, जिनमें फर्जी वोटिंग और दूसरे लाभों की सच्चाई सामने आएगी। पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि अगर प्रदेश के अन्य पंचायतों में भी ऐसी जांच कराई जाए तो कई ऐसे फर्जी मामलों का पर्दाफाश होगा।
यह खुलासा पंचायत चुनाव की पारदर्शिता और सिस्टम में सुधार के लिए आवश्यक सवाल खड़े करता है और प्रशासनिक स्तर पर नियंत्रण की कमी को दर्शाता है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और आगे की कार्रवाई पंचायत चुनाव और प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
