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June 5, 2026
Shimla

नदियों में बहती लकड़ियां और ‘पुष्पा’ का सवाल: आखिर हिमाचल का पुष्पा कौन?

हिमाचल प्रदेश की नदियों में बहकर आई लकड़ियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, वन विभाग ने रावी और ब्यास नदियों में बहकर आई लकड़ियों की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
24 जून को कुल्लू में बादल फटने के बाद आई बाढ़ में भारी मात्रा में लकड़ियां बहकर पंडोह डैम तक पहुंच गई थीं। सोशल मीडिया पर इन लकड़ियों की तस्वीरें वायरल होने के बाद, यह सवाल उठने लगा कि कहीं यह अवैध कटान का मामला तो नहीं है। कुछ लोगों ने इसकी तुलना ‘पुष्पा’ फिल्म में चंदन की तस्करी से भी की।
शुरुआत में, वन विभाग ने दो पन्नों की एक रिपोर्ट में इस मामले में ‘क्लीन चिट’ दे दी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि ये लकड़ियां बाढ़ की वजह से गिरे हुए पेड़ हैं और अवैध कटान का कोई निशान नहीं मिला। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शिलागढ़ में बादल फटने से 20,000 हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है, जिसमें से 6,000 हेक्टेयर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क का हिस्सा है।
मंत्री ने उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
वन विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट को लेकर संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने खुद सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि यदि पूरा पेड़ बहकर आता है तो यह समझा जा सकता है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में स्लीपर और लॉग्स का बहकर आना अवैध कटान की ओर इशारा करता है। उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, यह कहते हुए कि अधिकारी फील्ड में नहीं जाते और जंगलों की निगरानी ठीक से नहीं हो रही है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ के हालात पर चिंता जताते हुए हिमाचल की नदियों में लकड़ियों के बहकर आने को एक गंभीर मुद्दा बताया। कोर्ट ने इन सभी राज्यों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।
वन विभाग की नई जांच
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद, वन विभाग फिर से हरकत में आ गया है। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) कमलेश कुमार पंत ने रावी और ब्यास नदियों में आई लकड़ियों की फिर से रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है। इस नई जांच के आधार पर ही सरकार अपना जवाब तैयार कर सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। जांच के लिए संबंधित क्षेत्रों में ड्रोन से मैपिंग भी करवाई जाएगी ताकि कोर्ट को सही स्थिति से अवगत कराया जा सके।

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