मंडी (हिमाचल प्रदेश): भारी बारिश और बादल फटने की घटना ने मंडी जिले के धर्मपुर बस अड्डे में भारी तबाही मचाई है। हिमाचल सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) को इस आपदा में एक ही रात में करीब 6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस बार की तबाही के बाद सरकार ने धर्मपुर बस अड्डे को दूसरी जगह शिफ्ट करने का फैसला किया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब बस अड्डे को नुकसान हुआ हो; इससे पहले 2013 और 2015 में भी इस क्षेत्र में भारी नुकसान हो चुका है।
20 बसें पूरी तरह क्षतिग्रस्त, डीजल पंप भी तबाह
बादल फटने के कारण एचआरटीसी की 20 बसें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इनमें धर्मपुर डिपो की 11 साधारण बसें, जेएनएनयूआरएम की 7 बसें, एक बिलासपुर और एक सरकाघाट डिपो की बस शामिल हैं। कई बसों की बॉडी पूरी तरह टूट चुकी है, जिससे इनका उपयोग अब संभव नहीं है। इसके अलावा, बस अड्डे के दो डीजल पंप पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, और उनके रिकॉर्ड भी खराब हो चुके हैं।

बस अड्डे का ढांचा और रिकॉर्ड भी बर्बाद
बस अड्डे के इंचार्ज रूम, बुकिंग काउंटर, कंप्यूटर, प्रिंटर, स्टोर आइटम्स, टायर, बैटरी, गैरेज रिकॉर्ड, वेल्डिंग मशीन और अन्य वर्कशॉप सामग्री पूरी तरह नष्ट हो गई है। इस तबाही ने बस अड्डे के संचालन को पूरी तरह ठप कर दिया है।
सरकार का फैसला: बस अड्डा होगा शिफ्ट
इस बार की घटना के बाद सरकार ने धर्मपुर बस अड्डे को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय लिया है। अब यहां केवल बस ठहराव की सुविधा होगी, जबकि बस डिपो का कार्यालय और अन्य सुविधाएं किसी अन्य स्थान पर स्थापित की जाएंगी। यह निर्णय मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) आरडी नजीम, एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
उपमुख्यमंत्री ने किया दौरा, नुकसान की रिपोर्ट तैयार
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने घटनास्थल का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। निगम प्रबंधन ने मंडी के जिला मजिस्ट्रेट से नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसे बैठक में प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में एचआरटीसी को 6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
आगे की योजना
धर्मपुर बस अड्डे को शिफ्ट करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि बार-बार होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारण इस स्थान पर बस अड्डा चलाना अब व्यावहारिक नहीं है। नया स्थान चयन करने और बुनियादी ढांचा तैयार करने की योजना पर काम शुरू हो गया है।
यह घटना एक बार फिर हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर योजना और ढांचागत सुधारों की जरूरत को रेखांकित करती है।
