सिरमौर (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित एक मंदिर में उस समय अजूबा नजारा देखने को मिला, जब भगवान परशुराम जी की पालकी बिना अनुमति उठाने पर दो युवकों के कंधों से चिपक गई और उन्हें करीब 15 मिनट तक मंदिर परिसर में इधर-उधर दौड़ाती रही। यह घटना देव शक्ति के अद्भुत प्रमाण के रूप में सामने आई, जिसने श्रद्धालुओं को हैरान कर दिया।
घटना शिलाई से श्रीरेणुकाजी पहुंची भगवान परशुराम जी की पालकी से जुड़ी है। मंदिर समिति के सदस्यों के अनुसार, पालकी उठाने के सख्त नियम हैं, जिसमें केवल अधिकृत व्यक्ति ही इसे कंधे पर ले सकते हैं। लेकिन कुछ उत्साही युवाओं ने भंडारी की अनुमति के बिना पालकी उठा ली। जैसे ही पालकी उनके कंधों पर रखी गई, वह मानो चिपक गई। युवकों के हाथ पालकी से नहीं छूट पा रहे थे और पालकी में अचानक आई शक्ति ने उन्हें अपने वश में कर लिया।
पालकी युवकों को आगे-पीछे, दाएं-बाएं घुमाती रही, जिससे मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद पुजारी, भंडारी, देवगूर और श्रद्धालु सभी दंग रह गए। करीब 15 मिनट तक यह प्रचंड स्वरूप चलता रहा। कुछ श्रद्धालुओं ने इसे भगवान परशुराम की कृपा बताया, तो कुछ ने ईश्वरीय चेतावनी कहा कि बिना अनुमति देव पालकी को छूना अनुचित है।
मंदिर के पुजारी ने बताया, “देव पालकी के साथ अनुशासन और मर्यादा का पालन जरूरी है। यह केवल परंपरा नहीं, आस्था का प्रतीक है। ऐसी घटनाएं साबित करती हैं कि देवता खुद अपनी गरिमा की रक्षा करते हैं।” बाद में पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर माहौल शांत किया और पालकी को नियंत्रित किया।
मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति पालकी उठाने से पहले अनुमति जरूर ले, ताकि धार्मिक परंपराओं की मर्यादा बनी रहे। यह घटना न केवल चमत्कार के रूप में याद की जाएगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि देव कार्यों में श्रद्धा के साथ अनुशासन का पालन आवश्यक है।
