शिमला, 15 नवंबर: हिमाचल प्रदेश के बैंकों में करीब 352 करोड़ रुपये की राशि ऐसी पड़ी है, जिस पर पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से किसी ने दावा नहीं किया। ये राशि 10.77 लाख से ज्यादा निष्क्रिय खातों में जमा है। बैंकिंग नियमों के तहत लंबे समय तक कोई लेन-देन या दावा न होने पर ऐसी राशि को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEAF) में ट्रांसफर कर दिया जाता है। अब राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) ने इन हकदारों तक राशि पहुंचाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है।
सबसे ज्यादा राशि SBI, PNB और UCO बैंक में
आंकड़ों के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में सबसे अधिक 119 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में 69 करोड़ और यूको बैंक में 36 करोड़ रुपये निष्क्रिय खातों में पड़े हैं। बाकी राशि अन्य बैंकों में बंटी हुई है। इन खातों के निष्क्रिय होने के पीछे मुख्य वजहें हैं—खाताधारकों का स्थानांतरण, बैंक बदलना, दस्तावेज अपडेट न करना या पूरी तरह खाते को भूल जाना।
कांगड़ा टॉप पर, शिमला-मंडी-सोलन में भी करोड़ों
जिलावार आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कांगड़ा जिले में सबसे ज्यादा 2.25 लाख निष्क्रिय खाते हैं, जिनमें 74.70 करोड़ रुपये जमा हैं। इसके बाद शिमला (1.35 लाख खाते, 64.42 करोड़), सोलन (1.41 लाख खाते, 42.18 करोड़) और मंडी (1.38 लाख खाते, 39.59 करोड़) जैसे जिलों का नंबर आता है। कुल मिलाकर 12 जिलों में 10,77,428 खाते और 352.52 करोड़ रुपये की राशि निष्क्रिय पाई गई है।
जिलावार विवरण (खाते और राशि करोड़ में):
- बिलासपुर: 46,784 खाते – 14.02 करोड़
- चंबा: 43,692 खाते – 15.19 करोड़
- हमीरपुर: 82,368 खाते – 21.07 करोड़
- कांगड़ा: 2,25,602 खाते – 74.70 करोड़
- किन्नौर: 13,355 खाते – 5.33 करोड़
- कुल्लू: 90,523 खाते – 20.78 करोड़
- लाहौल-स्पीति: 6,809 खाते – 4.90 करोड़
- मंडी: 1,38,176 खाते – 39.59 करोड़
- शिमला: 1,35,398 खाते – 64.42 करोड़
- सिरमौर: 59,753 खाते – 19.83 करोड़
- सोलन: 1,41,154 खाते – 42.18 करोड़
- ऊना: 93,814 खाते – 30.43 करोड़
- कुल: 10,77,428 खाते – 352.52 करोड़
सरकार के 9,456 खाते भी निष्क्रिय, 26.72 करोड़ जमा
हैरानी की बात यह है कि हिमाचल सरकार के विभिन्न विभागों के 9,456 खाते भी दस साल से अधिक समय से निष्क्रिय पड़े हैं। इनमें योजनाओं, विभागीय खर्चों और कार्यालयी गतिविधियों से जुड़े खाते शामिल हैं, जिनमें कुल 26.72 करोड़ रुपये जमा हैं।
अभियान का असर: अक्टूबर में 7.95 करोड़ लौटाए
एसएलबीसी के अभियान से सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अक्टूबर महीने में ही 1,026 खाताधारकों की पहचान कर उन्हें 7.95 करोड़ रुपये लौटाए गए। अब नवंबर और दिसंबर में अभियान को और तेज करने की योजना है। बैंक टीमें पुराने पते, दस्तावेज, मोबाइल नंबर, आधार सत्यापन और शाखा रिकॉर्ड के आधार पर हकदारों तक पहुंच रही हैं।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रभारी दीपक कुमार ने कहा, “हमारा उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाना है। आधार और मोबाइल अपडेट रखें, ताकि ऐसे हालात न बनें।”
खाता निष्क्रिय होने से बचाने के उपाय:
- कम से कम साल में एक बार खाते में लेन-देन जरूर करें।
- मोबाइल नंबर और आधार हमेशा अपडेट रखें।
- पासबुक या नेट बैंकिंग से समय-समय पर बैलेंस चेक करें।
- बैंक के अलर्ट, SMS और नोटिस को अनदेखा न करें।
यदि आपको लगता है कि आपका कोई पुराना खाता निष्क्रिय हो सकता है, तो नजदीकी बैंक शाखा या RBI की DEAF वेबसाइट पर जाकर दावा करें। यह राशि आपकी है—इसे भूलें नहीं!
