बैजनाथ, 13 नवंबर: हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे गन्ने का जूस और लेमन सोडा बेचने वाले नितिन की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि गरीबी, मुफलिसी, लाचारी और स्वाभिमान की जद्दोजहद की एक मार्मिक कहानी को सामने ला दिया। नितिन और उनकी पत्नी सोनू ने कर्ज के बढ़ते बोझ और लगातार संघर्ष से तंग आकर जहरीला पदार्थ सेवन कर लिया। अस्पताल ले जाते समय नितिन की मौत हो गई, जबकि सोनू की हालत स्थिर बताई जा रही है। उनका अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर बहली कोठी स्मशानघाट में कर दिया गया।
यह कहानी तीन पीढ़ियों के ईमानदार संघर्ष की है। नितिन के दादा दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार चलाते थे। पिता किशन चंद पंचायत में चौकीदार की नौकरी करते थे और हमेशा स्वाभिमान को प्राथमिकता देते हुए मेहनत की कमाई से घर चलाते रहे। नितिन ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। पिछले पांच साल से वे सड़क किनारे रेहड़ी लगाकर जूस बेचकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। पत्नी सोनू भी उनका साथ देने लगीं। कमाई बढ़ी तो बच्चों के बेहतर भविष्य और आशियाने की चाहत जागी। पांचवीं और दूसरी कक्षा में पढ़ रहे दो बेटों के लिए नितिन ने दिन-रात मेहनत कर पैसा जोड़ा और मकान बनाना शुरू किया। पैसे कम पड़े तो निजी बैंक से लोन लिया। तीन महीने पहले मकान का मुहूर्त हुआ और परिवार नई छत के नीचे रहने लगा।
लेकिन कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता गया। हाल ही में समन जारी हुए, जो स्वाभिमान जीने वाले दंपति पर भारी पड़े। शायद उन्हें लगा कि तीन पीढ़ियों से चला आ रहा संघर्ष कभी खत्म नहीं होने वाला। परिणामस्वरूप दोनों ने जहरीला पदार्थ खा लिया। नितिन की मौत हो चुकी थी, जबकि सोनू का इलाज टांडा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। पुलिस के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि सोनू बयान देने की स्थिति में नहीं हैं।
नितिन की उदारता की मिसालें भी कम नहीं। गरीबी में जीते हुए भी वे बीमार और लाचार लोगों को मुफ्त जूस पिलाते थे। पड़ोसी अमर सिंह बताते हैं, “कई बार देखा कि कोई बीमार के लिए जूस लेने आए तो पैसे नहीं लिए। प्लास्टिक बोतल में अतिरिक्त जूस घर के लिए भी दे देते थे।”
अब सवाल बच्चों के भविष्य का है। बाल्यकाल में ही पिता का साया उठ चुका है। नगर परिषद वार्ड नंबर 8 के पार्षद राजन चौधरी कहते हैं, “सरकार की ओर से बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।” समाजसेवी नितेश सूद ने दुख जताते हुए कहा, “यह बहुत दुखद है। मैं परिवार को आर्थिक मदद दूंगा और बच्चों की परवरिश में सहयोग करूंगा।”
बुधवार को नितिन की मौत के बाद शव का पोस्टमॉर्टम बैजनाथ सिविल अस्पताल में हुआ और गुरुवार सुबह परिजनों को सौंपा गया। परिवार की यह त्रासदी समाज को झकझोर रही है। क्या गरीबी और कर्ज का बोझ इंसान को इतना मजबूर कर सकता है? मदद के लिए उठे हाथ अब बच्चों की जिंदगी संवार पाएंगे या नहीं, यह वक्त बताएगा।
