धर्मशाला (कांगड़ा), 24 नवंबर: हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध पर्यटन नगरी धर्मशाला में सरकारी भूमि की अवैध बिक्री का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी जमीन को सुनियोजित तरीके से करोड़ों रुपये में अवैध रूप से बेचा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांगड़ा के उपायुक्त ने एसडीएम और तहसीलदार धर्मशाला को 35 संदिग्ध इंतकाल (म्यूटेशन) की त्वरित जांच के आदेश जारी किए हैं।
जांच में सामने आया है कि धर्मशाला तहसील के तीन प्रमुख मुहालों – मोहली हारां दी मौजा खनियारा, मुहाल चकवन और मुहाल ठेहड़ में सरकारी भूमि को गलत तरीके से निजी हाथों में ट्रांसफर किया गया। इनमें से अधिकांश मामले करीब पांच साल पुराने बताए जा रहे हैं, लेकिन जिस सुनियोजित ढंग से यह अवैध सौदे किए गए, उसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया है।
राजनीतिक हस्तियां और बड़े कारोबारी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, इन अवैध इंतकाल में कई प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों और क्षेत्र के बड़े कारोबारियों के नाम शामिल हैं। साथ ही कुछ दलालों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर भी मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
तहसीलदार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
एसडीएम धर्मशाला मोहित रतन ने बताया, “तहसीलदार से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
तहसीलदार धर्मशाला गिरिराज ठाकुर ने भी पुष्टि की कि विभाग द्वारा मामले की गहन जांच की जा रही है।
सरकारी भूमि की अवैध बिक्री राज्य में एक गंभीर अपराध मानी जाती है। इस खुलासे के बाद जहां एक ओर प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है, वहीं स्थानीय लोग और राजनीतिक हलकों में इस मामले को लेकर खासा आक्रोश और चर्चा है। आने वाले दिनों में कई बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
