मंडी, 11 दिसंबर 2025
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने पर आज मंडी के पड्डल ग्राउंड में भव्य रैली का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे “विकास और वादों की पूर्ति का उत्सव” बताया, लेकिन इस जश्न में पार्टी के सबसे बड़े कद्दावर और छह बार के मुख्यमंत्री रहे स्व. वीरभद्र सिंह को जानबूझकर नजरअंदाज किए जाने का गंभीर आरोप लग रहा है।
रैली स्थल पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग्स और बैनर्स में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, नेहरू, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें तो लगीं, लेकिन हिमाचल कांग्रेस के “राजा साहब” कहे जाने वाले वीरभद्र सिंह की एक भी तस्वीर नहीं लगाई गई।
सबसे बड़ी बात यह कि खुद वीरभद्र सिंह के बेटे और वर्तमान कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह तथा उनकी मां एवं पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी इस रैली में शामिल नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार विक्रमादित्य सिंह अपनी पत्नी और मां प्रतिभा सिंह के साथ इस समय लंदन दौरे पर हैं। 12 दिसंबर को उन्हें लंदन में ब्रिटिश संसद परिसर में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से “यूथ आइकन” अवॉर्ड से नवाजा जाना है।
वीरभद्र गुट में खलबली, सुक्खू खेमे पर साइडलाइन करने का आरोप
पार्टी के अंदरूनी सूत्र बता रहे हैं कि वीरभद्र सिंह की तस्वीर न लगाना और उनके परिवार का रैली से दूर रहना महज संयोग नहीं है। सरकार बनने के बाद से ही सुक्खू गुट और वीरभद्र गुट के बीच खींचतान जारी है। हाल ही में प्रतिभा सिंह को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर विनय कुमार को कमान सौंपी गई। अब वीरभद्र खेमे से सिर्फ विक्रमादित्य सिंह ही कैबिनेट में बचे हैं।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,
“राजा साहब को पोस्टरों से गायब करना सिर्फ एक तस्वीर का मामला नहीं, बल्कि उनके पूरे राजनीतिक विरासत को मिटाने की कोशिश है। यह संदेश साफ है कि अब हिमाचल कांग्रेस में सुक्खू युग शुरू हो गया है।”
विक्रमादित्य लंदन में सम्मानित होंगे
वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (हिमाचल-चंडीगढ़) के प्रमुख सुमित सिंगला ने 2 नवंबर को शिमला में विक्रमादित्य सिंह से मुलाकात कर उन्हें औपचारिक निमंत्रण सौंपा था। लंदन में 12 दिसंबर को होने वाले समारोह में उन्हें “यूथ एंड आइकॉन अवॉर्ड” दिया जाएगा। हालांकि कई नेताओं का कहना है कि इतनी बड़ी सरकारी वर्षगांठ रैली के ठीक एक दिन पहले विदेश जाना भी एक तरह का “संदेश” है।
कुल मिलाकर मंडी की यह रैली भले ही सुक्खू सरकार के लिए जश्न का मौका हो, लेकिन वीरभद्र सिंह की अनुपस्थिति और उनके परिवार का दूर रहना यह बता रहा है कि हिमाचल कांग्रेस के अंदर अभी गुटबाजी कम होने का नाम नहीं ले रही। आने वाले दिनों में यह खाई और गहरी हो सकती है।
