बैजनाथ (कांगड़ा), (वीर खड़का ) 7 फरवरी 2026: हिमाचल प्रदेश के दूरदराज इलाके बड़ाभंगाल के पात्र निवासियों को एक बड़ी राहत मिली है। वन अधिकार अधिनियम, 2006 (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers (Recognition of Forest Rights) Act) के तहत आज बीड़ में आयोजित एक समारोह में सामुदायिक अधिकार पट्टे (Community Forest Rights Pattas) वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम उपमंडल बैजनाथ के सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) संकल्प गौतम ने हिस्सा लिया। उन्होंने पट्टे प्राप्त करने वाले लोगों को बधाई देते हुए कहा कि यह अधिनियम वर्षों से जंगलों में रहने वाले समुदायों को उनके वैधानिक अधिकार प्रदान करने का माध्यम है।
एसडीएम गौतम ने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दो प्रकार के पट्टे दिए जाते हैं—व्यक्तिगत (Individual Forest Rights) और सामुदायिक (Community Forest Rights)। सामुदायिक पट्टों से स्थानीय लोगों को न केवल आजीविका के साधन (जैसे लघु वन उपज संग्रह, चराई आदि) मिलते हैं, बल्कि जंगलों के संरक्षण, प्रबंधन और सतत उपयोग में सक्रिय भागीदारी का अधिकार भी प्राप्त होता है। इससे वनों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
उन्होंने प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी साझा की:
- ग्राम स्तर पर वन अधिकार समिति (Forest Rights Committee) का गठन।
- पात्र व्यक्तियों/समुदायों की पहचान और दावों की प्रारंभिक जांच।
- ग्राम सभा की मंजूरी के बाद प्रस्ताव उपमंडल स्तरीय समिति को।
- गहन जांच, अभिलेख सत्यापन और स्थल निरीक्षण के बाद जिला स्तरीय समिति (जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त करती है) द्वारा अंतिम स्वीकृति।
- स्वीकृति के बाद पट्टे जारी।
एसडीएम ने हिमाचल प्रदेश सरकार और कांगड़ा के उपायुक्त का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से पात्र लोगों को अधिकार मिल रहे हैं और समुदायों की भागीदारी से वन संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन पट्टों से बड़ाभंगाल के निवासियों को नई आजीविका के अवसर मिलेंगे और वे जंगलों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
यह घटना हिमाचल प्रदेश में वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, खासकर कांगड़ा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों जैसे बड़ाभंगाल में, जहां पहले लंबित दावों पर कार्रवाई की मांग उठती रही है।
कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुराग शर्मा, पूर्व अनुसूचित जाति सैल के अध्यक्ष रविंदर बिट्टू, पंचायत प्रतिनिधि, वन अधिकार समिति के सदस्य तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
यह वितरण न केवल स्थानीय समुदायों के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन स्थापित करने का उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।
