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June 9, 2026
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Kangra News: कांगड़ा घाटी की शान ‘स्टीम लोको ZB-66’ को मिला नया जीवन, पर्यटकों को फिर कराएगा भाप के युग की सैर

कांगड़ा , 09 जून। (वीर खड़का )

हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक कांगड़ा घाटी रेलवे की अमूल्य धरोहर और पहचान बन चुका स्टीम लोको ZB-66 एक बार फिर पटरियों पर लौटने के लिए तैयार है। पर्यटकों और रेल प्रेमियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए इस विरासत इंजन को 8 जून 2026 को रेवाड़ी हेरिटेज शेड से वापस पठानकोट लाया गया है। आवश्यक रखरखाव के बाद यह इंजन कांगड़ा घाटी रेलवे के सुरम्य नैरो गेज मार्ग पर अपनी ऐतिहासिक उपस्थिति दर्ज कराएगा।

विरासत संरक्षण की अनूठी मिसाल

वर्ष 1952 में ब्रिटेन की प्रसिद्ध कंपनी डब्ल्यू.जी. बैगनॉल लिमिटेड द्वारा निर्मित इस भाप इंजन ने दशकों तक भारतीय रेल की सेवा की। समय के साथ इसके बॉयलर, टेंडर, अंडरफ्रेम और ड्राइवर केबिन को भारी क्षति पहुंची, जिसके चलते वर्ष 2012 तक इसका संचालन लगभग बंद हो गया था।

इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने का जिम्मा अमृतसर वर्कशॉप ने उठाया। इंजीनियरों और तकनीशियनों की वर्षों की मेहनत के बाद मार्च 2017 में इंजन को नया जीवन मिला और इसे पुनः चालू अवस्था में लाया गया। इसके बाद जून 2023 में इसे रेवाड़ी हेरिटेज शेड भेजा गया था, जहां से अब इसकी वापसी हुई है।

कई यादगार यात्राओं का गवाह

पुनर्जीवित होने के बाद ZB-66 ने कई विशेष यात्राओं का सफल संचालन किया।

  • नवंबर 2018 में ब्रिटिश पर्यटकों के लिए पालमपुर से बैजनाथ पपरोला तक विशेष चार्टर्ड स्टीम ट्रेन चलाई गई।
  • वर्ष 2019 में स्कूली बच्चों को भारतीय रेल की विरासत से परिचित कराने के लिए जनवरी और फरवरी में विशेष स्टीम ट्रेन सेवाएं संचालित की गईं।

तकनीकी विशेषताएं

  • निर्माता: डब्ल्यू.जी. बैगनॉल लिमिटेड, यूके (1952)
  • व्हील व्यवस्था: 2-6-2T
  • लंबाई: 26 फुट 7 इंच (टेंडर सहित 42 फुट 7 इंच)
  • कुल वजन: 43 टन
  • ट्रैक्शन क्षमता: 8000 पाउंड
  • ईंधन क्षमता: 3.5 टन कोयला
  • पानी क्षमता: 700 गैलन (लगभग 3000 लीटर)
  • अधिकतम गति: 30 किलोमीटर प्रति घंटा
  • ब्रेक प्रणाली: वैक्यूम ब्रेक

पर्यटन और विरासत संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर रेलवे का उद्देश्य केवल इस ऐतिहासिक इंजन को संरक्षित रखना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास से जोड़ना भी है। ZB-66 की वापसी से कांगड़ा घाटी रेलवे में विरासत पर्यटन को नई पहचान मिलेगी और पर्यटकों को भाप इंजनों के स्वर्णिम दौर का अनूठा अनुभव प्राप्त होगा।

भाप के धुएं और सीटी की गूंज के साथ ZB-66 की वापसी, कांगड़ा घाटी रेलवे के स्वर्णिम इतिहास को फिर से जीवंत करने जा रही है।

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