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May 11, 2026
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प्रताप सिंह कैरों के जमाने में बन चुका था बीर,बिलिंग, राजगुंधा मार्ग

बीड़-बिलिंग घाटी में बेशक विकास की इबारत में लिखे जाने की वर्तमान में की जाने लगी हैं मगर बीड़-बिलिंग-राजगुंधा मार्ग प्रताप सिंह कैरों के जमाने में बन चुका था। बड़ा भंगाल रियासत के पाल वंशज ने 1950 में इसकी पटकथा लिखी थी जिसे 1962 में मूर्त रूप दिया गया। पूर्व समय में यहां तक पहुंचने के लिए केवल मात्र पगडंडी नुमा ही रास्ता था। कहीं-कहीं तो घने जंगलों में पहाड़ी ढलानों को पार कर बड़ा भंगाल पहुंचा जाता था।
बात 1950 की है जब बड़ा भंगाल रियासत के वंशज जैलदार प्रीथिपाल अक्सर गर्मियों में पहाड़ों का रुख किया करते थे। उस समय वह अपने सहयोगीयों के साथ राजगुंधा, बरोट और पलाचक तक जाया करते थे। पाल वंशजो के जैलदार प्रीथी पाल के पौत्र विक्रमादित्य सिंह और रक्षक पाल बताते हैं कि इन तमाम प्राकृतिक सैरगाहों की भनक जब 1956 में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री को लगी तो वह भी बीड़-भंगाल के दीदार को लालायित हो उठे और उन्होंने जैलदार प्रीथिपाल से संपर्क साधा। तब कांगड़ा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति जिला महापंजाब का हिस्सा हुआ करते थे जबकि मंडी पुराने हिमाचल का अहम हिस्सा थी। जैलदार प्रीथिपाल ने प्रताप सिंह कैरों को छोटा भंगाल से लेकर बड़ा भंगाल तक की सैर करवाई। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों से सफर तय कर जब वे वापस पहुंचे तो जैलदार ने प्रताप सिंह कैरों से राजगुंधा बरोट तक सड़क बनाने का आग्रह किया जिसे कैरों ने तुरंत मान लिया। उन्होंने पंजाब में जाकर अधिकारियों से इस रास्ते के निर्माण के लिए आदेश दे डाले। तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेशों पर अमल करते हुए अधिकारियों ने आह्जू से लेकर राजगुंधा तक जीप योग्य सड़क का निर्माण कर दिया। 1960 में प्रताप सिंह कैरों पहली बार जीप लेकर राजगुंधा तक पहुंचे थे। महापंजाब के कांगड़ा, कुल्लू और लाहौल स्पीति के हिमाचल में समायोजन के बाद इस सड़क का रखरखाव न होने की वजह से यह सड़क मार्ग बिलिंग से आगे लगभग बंद हो गया। वर्तमान में बिलिंग से बरोट वाया राजगुंधा बन चुका है। हालांकि बरोट से बड़ा भंगाल होकर कुल्लू और चंबा पैदल पहुंचा जा सकता है। यह एक बेहतर ट्रैकिंग रूट के रुप में अपनी पहचान भी बना चुका है।
ऐसे पहुंचे राजगुंधा
जिला कांगड़ा के उपमंडल मुख्यालय बैजनाथ से सड़क मार्ग से बीड़ बस से पहुंचा जा सकता है। उसके आगे बिलिंग, राजगुंधा और बरोट तक टैक्सी छोटी गाड़ी से पहुंचा जा सकता है

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