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September 30, 2026
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देओल गांव में स्थित माता कलहोली का मंदिर है पाल वंशज की कुलदेवी।

बीड़-भंगाल रियासत के पाल वंशजों की कुलदेवी मानी जाती है माता कलहोली। वर्तमान यहां का जिम्मा 2006से दशनाम जूना अखाड़ा संबंध महंत शशि गिरी जी महाराज संभाले हुए हैं। बताते हैं कि पाल वंशजों के शासक राजा रघुनाथ पाल 17वीं शताब्दी में अपने दल बल के साथ चंबा को रवाना हुए तो पिंडी स्वरूप देवी को भी अपने साथ ले गए। जब वे वापस लौटे तो देओल गांव के पास रात्रि विश्राम के लिए रुके। सुबह जब वे बीड़ जाने लगे तो देवी को उठाने की कोशिश की तो उठाई नहीं जा सकीं। काफी प्रयास के बाद जब देवी को उठाने में नाकाम हुए तो स्थानीय ग्रामीण के कहने पर बीड़ लौट आए। रात्रि के समय मां ने काली माता के स्वरूप में राजा को दर्शन दिए और कहा कि आप राजपाट संभाले मैं इसी स्थान से आपकी रक्षा करूंगी। बस उसी समय से देवी मां इस स्थान पर डेरा जमाए हुए हैं और पाल वंशजों की कुलदेवी मानी जाती है। वर्तमान में बीड़ में रह रहे पाल वंशजों का एक बड़ा कुटुंब आज भी इस देवी को अपनी आराध्य देवी माने हुए हैं। मान्यता है कि देवी धन, बल और बुद्धि ज्ञान से संपन्न है इसलिए श्रद्धानुरूप पधारे प्रत्येक अनुयाई पर कृपा बरकरार रखती है। बाक्स लगाएं : स्थानीय महंत कृष्णा देवी हाल ही में माता कलहोली के स्वप्न में दिए दर्शनों के अनुरूप 3600 किमी की नर्मदा यात्रा कर वापस लौटी हैं। उन्होंने बताया कि तकरीबन 6 माह पूर्व उन्हें मां ने स्वप्न में इस बारे आदेश दिया था। क्योंकि मां कलहोली के प्रति अपार श्रद्धा थी। इसलिए उन्होंने यह यात्रा की है। नौ राज्यों की यात्रा उन्होंने 4 माह में मुकम्मल की। इस दौरान मां की इच्छा के अनुरूप उन्होंने किसी भी वाहन का उपयोग नहीं किया। उल्लेखनीय है कि नर्मदा में किसी भी बड़ी नदी का जल समावेशित नहीं होता और यह कई राज्यों को लगाती हुई सीधा गंगासागर में समुद्र में मिलती

लेखक विकास बावा

साभार पंजाब केसरी

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