सड़क बनी तो सुधर सकती है क्षेत्रवाशियों की आर्थिक स्थिति । 2 साल पहले हुई थी
हुई थी फारेस्ट क्लीयरेंस।
30 मई 2024 बैजनाथ (विकास बावा सौजन्य पंजाब केसरी )
राजनेताओं को इस बात की दरकार रहती है कि वे जो भी परियोजना धरातल पर उतारें उसका राजनीतिक लाभ जरूर मिले, वजह शायद यही रही कि पिछले 40 सालों से लटकी उत्तराला होली सड़क मुकम्मल नहीं हो पाई है। मार्ग कांगड़ा और चंबा दो जिलों में आता है कोई भी बड़ा गांव या आबादी नहीं हैं लिहाजा वोट भी नहीं हैं। सड़क मार्ग के निर्माण के बाद दोनों जिलों के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को निश्चित तौर पर इसका सीधा फायदा होगा। वर्तमान में बैजनाथ से होली(चंबा) जाने के लिए 300 किलोमीटर सफर का तय करना पड़ता है जबकि उत्तराला से होली वाया जालसू की दूरी मात्र 70 किलोमीटर है। जालसू जोत के दोनों तरफ तराई वाले इलाकों में नाग छतरी, गूगल धूप, कुठ, कड़ू, बतीस जैसी औषधीय जड़ी बूटियों के अलावा पैदा होने वाले आलू, राजमा, काला जीरा, फुल गोभी, बंद गोभी, ब्रोकली, मूली, लाल गाजर, चुकंदर जैसी नकदी फसलों को किसानों को शहरी मंडियों में पहुंचाना आसान होगा। यह तमाम इलाका नकदी फसलों के लिए जिनके विपणन से युवाओं के एक बड़े तबके को रोजगार के संसाधन भी उपलब्ध होंगे। वर्तमान में यहां तक पहुंचने के लिए खड़ी ढ़लानें पार करनी पड़ती हैं। एसडीओ लोक निर्माण विभाग उपमंडल भरमौर विशाल चौधरी और जेइ हेम राज ने बीते वर्ष अपने दलबल सहित प्रस्तावित मार्ग का दौरा किया था। उनका मानना है कि जालसू जोत से जिला चंबा के होली की तरफ सड़क निर्माण में कोई दिक्कत इसलिए नहीं कि यह पहाड़ियां भुरभुरी मिट्टी की हैं, लिहाजा सड़क मार्ग आसानी से निकाला जा सकता है जबकि जोत के बैजनाथ की तरफ कठोर चट्टानों की पहाड़ियां है। लोक निर्माण विभाग के भरमौर और बैजनाथ मंडल ने फॉरेस्ट क्लीयरेंस के एवज में तकरीबन 3.5 करोड रुपए की राशि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को जमा करवा दी गई है। इसलिए जरूरी मार्ग:
कांगड़ा और चंबा के लोग सांस्कृतिक दृष्टि से एक जैसे हैं लिहाजा आपस में रिश्ते-नातों में बंधे हैं। वर्तमान में भी लोग वाया जालसु जोत चंबा से कांगड़ा पैदल आवागमन करते हैं। पर्यटन की दृष्टि से यह मार्ग स्विट्जरलैंड से कम नहीं होगा और प्रदेश को बाहरी राज्यों से काफी तादात में पर्यटक मिलेंगे। ऊपरी क्षैत्रों के रहने वाले युवाओं के लिए होटल ढाबा टी स्टॉल जैसे व्यवसाय के माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। क्या कहते हैं अधिशासी अभियंता भरमौर: भरमौर मंडल के अधिशासी अभियंता इं मीत शर्मा का कहना है कि भरमौर मंडल के माध्यम से होली से लेकर नयाग्रां तक 15 किलोमीटर सड़क तैयार है। चन्नी पुल से लेकर चन्नी गांव तक 2 किलोमीटर के अलावा 3 किलोमीटर का टेंडर हाल ही में हुआ है। वहां से सुराही पास तक सितारा किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाना शेष है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की राशि एक करोड़ 25 लख रुपए वन विभाग को जमा करवा दी गई है। क्या कहते हैं अधिशासी अभियंता बैजनाथ:
बैजनाथ मंडल के अधिशासी अभियंता ई. संजीव सूद का कहना है कि उतराला से 13 किलोमीटर सड़क का निर्माण कार्य किया जा चुका है जबकि आगे की डीपीआर बनाई जा रही है। डीपीआर बनते ही सरकार को भेजी जाएगी। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के एवज में विभाग ने पहले ही दो करोड़ तीन लाख रुपए वन विभाग को जमा करवा दिए हैं।
