शिमला। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी) गोकुल बुटेल ने राज्य सरकार से मिलने वाले 2.5 लाख मासिक वेतन को छोड़ दिया है। वे हर महीने वेतन के रूप में महज 1 रुपये टोकन मनी के तौर पर लेंगे। वित्तीय संकट से जुझ रही प्रदेश सरकार ने संसाधन जुटाने के लिए सभी वर्गों से आग्रह किया था। युवा नेता गोकुल बुटेल सबसे पहले आगे आए हैं।
बुटेल ने अपने इस निर्णय को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखा था। सामान्य प्रशासन विभाग ने शनिवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं। गोकुल बुटेल मुख्यमंत्री के प्रधान आईटी सलाहकार हैं। इससे पहले वह पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के भी आईटी सलाहार रह चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी आलाकमान ने इन्हें वॉर रूम की जिम्मेदारी सौंपी थी। अभी जम्मू-कश्मीर में वॉर रूम की जिम्मेदारी भी इनके पास है जो पार्टी आलाकमान ने दी है। राहुल गांधी की टीम के सदस्य हैं। राजनीति में इस तरह की मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है। कोई नेता होते हैं जो अपनी कमाई को सामाजिक हितों के लिए छोड़ देते हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने 51 लाख किए थे दान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी आपदा के समय में 51 लाख रुपए की राशि अपने आपदा राहत कोष के लिए दी थी। कोरोना के समय में भी नेताओं ने अपना वेतन छोड़ा था। उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए गोकुल बुटेल ने अब अपना वेतन छोड़ दिया है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में क्या कहा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को लिखे पत्र में कहा कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। कठिन वित्तीय हालातों से राज्य सरकार गुजर रही है। ऐसे में वह चाहते हैं कि सरकार से उन्हें मिलने वाला मासिक वेतन वह न लें। वह दिसंबर महीने तक वेतन नहीं लेंगे। उन्हाेंने कहा कि राज्य सरकार के सामने चुनौतीपूर्ण समय है और ऐसे समय में वह अपनी ओर से मदद करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री की टीम के समर्पित सदस्य हैं और मुख्यमंत्री से प्रेरणा लेते हुए इस तरह का निर्णय ले रहे हैं जिन्होंने अपनी जीवन भर की पूंजी डोनेट कर दी थी। कठिन वित्तीय हालातों को लेकर कई तरह के आरोप भी सरकार पर लगते रहे हैं मगर गोकुल बुटेल ने इन आरोपों पर प्रहार किया है।
85 हजार करोड़ का कर्ज हिमाचल पर
प्रदेश पर लगभग 85 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। सरकार कठिन वित्तीय हालातों से गुजरी रही है। इस पर आपदा भी प्रदेश सरकार का पीछा नहीं छोड़ रही है वहीं कर्मचारियों की करोड़ों रूपए की देनदारी है। करीब सवा लाख रुपये हिमाचल के प्रत्येक व्यक्ति पर कर्ज के रूप में है, ऐसे में गोकुल बुटेल ने सरकार की मदद का बड़ा संदेश दिया है। इस तरह से यदि उच्च पदों पर बैठे लोगों का त्याग सामने आएगा तो समाज में बड़ा बदलाव हो सकता है।
