10 नवंबर बैजनाथ
पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप में दुसरे स्थान पर आने वाले उपमंडल के संसाल गांव के 37 वर्षीय रंजीत सिंह किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर आने वाले पहले भारतीय पैराग्लाइडर पायलट बन गए हैं। अब तक कोई भी भारतीय पायलट अंतरराष्ट्रीय स्तर की पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता में इस प्रकार का प्रदर्शन नहीं कर सका है। एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाले रंजीत सिंह ने मनाली में 2006 में पैराग्लाइडिंग की बारीकियों को सीखना शुरू किया और बाद में उतरा खंड में इस साहसिक खेल को अपनी आजीविका का साधन बना लिया। रंजीत सिंह 6 माह उत्तराखंड और 6 माह हिमाचल में पैराग्लाइडिंग करके अपने परिवार को चला रहे हैं। रंजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने एक्यूरेसी कप में अब तक ट्रॉफी प्राप्त की है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में यह प्रदर्शन अब तक का बेहतर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी सिलेक्शन कोलंबिया में होने वाले सुपर फाइनल के लिए हुई है लेकिन आर्थिक कारणों से बह इसमें भाग नहीं ले पाएंगे। विदेश में किसी भी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कम से कम 80 हजार से एक लाख की जरूरत रहती है और विदेशों में कई कंपनियां खिलाड़ियों को स्पॉन्सर करती हैं लेकिन भारत में अब तक कंपनियां इस साहसिक खेल से दूर रही हैं और सरकारों का भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता है। बताया कि उनकी इस उपलब्धि पर उनके परिजन बहुत खुश है।
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