बैजनाथ 13 दिसंबर 2024 साभार पंजाब केसरी (विकास बावा)
रसूखदार लोग अपने भवनों के नक़्शे तो पास करवा रहे हैं , लेकिन आम लोगों की फ़ाइलें 6 महीने तक कार्यालय में धूल फांक रही ।
पैराग्लाइडिंग के क्षेत्र में विख्यात बीड़ बिलिंग घाटी ने बेशक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना ली हो, लेकिन यहां निर्माण के लिए बनाए गए तमाम नियम हवा हवाई होने लगे हैं। हालात इस कदर खराब है कि कभी अपने प्राकृतिक सौंदर्य और चाय बागानों के लिए विख्यात इस घाटी में अब कंक्रीट के जंगल खड़े हो चुके हैं। उधर साडा ने भी अवैध भवनों को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी है और 60 भवनों को चिन्हित कर उनके बिजली पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दे दिए हैं। लेकर स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी(साडा) द्वारा बनाए गए निर्माण कार्यों के नियम आम लोगों के लिए तो जी का जंजाल है मगर प्रभावशाली और रसूखदार लोग अपने भवनों के नक्शे तो जैसे कैसे पास करवा लेते हैं लेकिन आम लोगों की फाइलें छह महीने तक कार्यालय की धूल फांकती हुई नजर आती हैं। कई जगहों पर चाय बगीचों में ही लोगों ने भवनों के निर्माण कर दिए हैं तो कई जगहों पर जंगलों को काटकर यहां बहु मंजिला भवन बनाए गए हैं। इतना ही नहीं पर्यटन विभाग द्वारा दो-दो पार्किंग बिना अनुमति के बनाई गई है जिन पर बाकायदा माननीय उच्च न्यायालय ने कड़ा संज्ञान तक लिया है। आम लोगों का आरोप है कि उन्हें अपने भवनों के नक्शे पास करवाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है ऐसे में न केवल उन्हें समय की बर्बादी का सामना करना पड़ता है बल्कि निर्धारित फीस से कहीं अधिक राशि कथित तौर पर प्रारूपकारों को देनी पड़ती है तब जाकर उनके भवन पास होते हैं। उधर एसडीएम बैजनाथ और साडा के अध्यक्ष देवी चंद ठाकुर का कहना है कि बीड में बनाए गए तकरीबन 60 अवैध भवनों को चिन्हित किया गया है और उनके बिजली पानी काटने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
क्षेत्र में साड़ा का अपना एक कार्यालय तक नहीं है
यहाँ काबिलेगौर है कि इतने बड़े इलाके में साडा के नियम लागू करवाए जाने के बावजूद स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी का अपना एक कार्यालय तक नहीं है उक्त कार्यालय पर्यटन विभाग के सूचना केंद्र से संचालित किया जा रहा है। हम लोगों की दिक्कत यह है कि महीनों तक फाइलें इस कार्यालय से लेकर एटीपी कार्यालय तक पहुंचती है जिससे उन्हें भवन निर्माण में काफी दिक्कत आती है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के अधिकारी ने बताया कि हाई और लो रिस्क को लेकर विभाग द्वारा निर्धारित मापदंड तय किए जाते हैं, इसी वजह से कई बार भवन के नक्शे देरी से पास होते हैं।
