July 21, 2026
Shimla

Himachal News: सरकारी अस्पतालों में पर्ची के लिए 10 रुपये शुल्क, मुफ्त एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सुविधा भी खत्म

शिमला (राज्य ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अब मरीजों को पर्ची बनवाने के लिए 10 रुपये का शुल्क देना होगा। राज्य सरकार ने रोगी कल्याण समिति की सेवाओं को मजबूत करने के लिए यह निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। इसके साथ ही 26 मई से 14 विशेष श्रेणियों के लिए मुफ्त एक्स-रे, ईसीजी और अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी समाप्त कर दी गई है।

स्वास्थ्य विभाग का फैसला
स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव की ओर से जारी आदेश के अनुसार, मंत्रिमंडल उपसमिति की सिफारिश पर पर्ची शुल्क लागू किया गया है। अब मरीजों को एक्स-रे के लिए 60 रुपये, अल्ट्रासाउंड के लिए 120 रुपये और ईसीजी के लिए 35 रुपये का भुगतान करना होगा। यह शुल्क उन 14 श्रेणियों पर भी लागू होगा, जिन्हें पहले यह सुविधाएं मुफ्त मिलती थीं। इनमें कैंसर और किडनी रोगी, गर्भवती महिलाएं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, टीबी रोगी, दिव्यांग, मानसिक रोगी, जेल बंदी, एनआरएचएम लाभार्थी, मुफ्त दवा योजना के लाभार्थी, आपदा पीड़ित, एचआईवी पॉजिटिव मरीज, बाल सुधार गृह के बच्चे, वृद्धाश्रम और अनाथालय में रहने वाले लोग शामिल हैं। हालांकि, इन श्रेणियों के लिए 133 अन्य टेस्ट अब भी मुफ्त रहेंगे।

सरकार का तर्क
स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि मुफ्त पर्ची के कारण लोग इसे संभालकर नहीं रखते, जिससे चिकित्सकों को परेशानी होती है। 10 रुपये शुल्क लागू करने से मरीज इसे गंभीरता से लेंगे। उन्होंने बताया कि पीजीआई चंडीगढ़ में भी ऐसा शुल्क लिया जाता है। सरकार का कहना है कि यह शुल्क रोगी कल्याण समिति के तहत स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे और उपकरणों के रखरखाव को बेहतर करने के लिए लगाया गया है।

पर्ची शुल्क का इतिहास
पूर्व में सरकारी अस्पतालों में पर्ची शुल्क 25 पैसे हुआ करता था, जिसे बाद में बढ़ाकर एक रुपये किया गया। छोटे-मोटे शुल्क को लेकर मरीजों और कर्मचारियों के बीच होने वाली बहस को खत्म करने के लिए तत्कालीन सरकार ने पर्ची को मुफ्त कर दिया था। अब फिर से 10 रुपये शुल्क लागू किया गया है।

अस्पतालों पर बढ़ता दबाव
प्रदेश में ज्यादातर लोग इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में रोजाना 3,000 से 4,000 मरीज पहुंचते हैं। अन्य मेडिकल कॉलेजों में प्रतिदिन 700 से 2,000 और पूरे प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में 20,000 से 25,000 मरीज उपचार के लिए आते हैं।

स्वास्थ्य सचिव का बयान
स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी ने कहा कि पर्ची शुल्क और डायग्नोस्टिक जांच के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह कदम अस्पतालों की सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

इस निर्णय से जहां सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है, वहीं मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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