3 फ़रवरी 2025 बैजनाथ (वीर खड़का)
सर्दी के मौसम की शुरुआत के साथ ही पहाड़ी इलाकों में बर्फ़बारी की घटनाएं तेज़ हो गई हैं, जिसके कारण पर्वतीय क्षेत्र से सटे हुए तराई इलाकों में वन्यजीवों की गतिविधियों में भी वृद्धि देखने को मिल रही है। वन विभाग के अनुसार, बर्फ़बारी और तापमान में गिरावट के कारण पहाड़ों के जीव-जंतु अब समतल और तराई इलाकों की ओर रुख़ कर रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों और ग्रामीणों को खतरे का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में बैजनाथ के पहाड़ी क्षेत्रों से लगे तराई इलाकों में वन्यजीवों, खासकर तेंदुए, भालू की संख्या में अचानक वृद्धि देखी गई है। ये जानवर अब अपने शिकार की तलाश में बर्फ़बारी से नीचे उतर कर खेतों और गाँवों के पास आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे रात में घर से बाहर निकलने से डरते हैं और खेतों में काम करने में भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत सेहल के उप प्रधान कंचन अवस्थी ने वन विभाग को चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया है कि तेंदुआ दिन दिहाड़े रिहायशी इलाकों में घुस आया है और पालतू कुत्ते को भी उठा ले गया है जिसके चलते गाँव में दहशत का माहौल है। अमूमन गाँव के लोग या तो खेतों में काम करने के लिए चले जाते हैं या तो फिर दिहाड़ी मज़दूरी करने के लिए शाम तक घर से बाहर होते हैं और छोटे छोटे बच्चे घर में अकेले ही रहते हैं इसके चलते इन बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी बेहद चिंता का विषय बना हुआ है।
उधर बन परिक्षेत्र अधिकारी आदित्य सिंह ने एडवाइजरी जारी करते हुए हिदायत दी है कि शाम होते ही है बच्चों को घर से बाहर न भेजें और यदि जंगल में घास और लकड़ी के लिए जाते हैं तो समूह में आवाज़ करती हुई जाए। यदि अपने घर के आसपास जंगली जानवरों की गतिविधि का एहसास हो तो तुरंत वन विभाग को सूचित करें। वन अधिकारी ने कहा, “हम तेंदुए की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे रात में अकेले बाहर न निकलें और अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर रखें। “तेंदुए के बढ़ते हमलों ने गाँव के लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और वन विभाग ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे, या यह आतंक और बढ़ेगा?

