बैजनाथ (हिमाचल प्रदेश):
शिव नगरी बैजनाथ का मिनी सचिवालय परिसर इन दिनों कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस सचिवालय में तहसील, नगर परिषद, शिक्षा विभाग, ट्रेजरी, सीडीपीओ, एसडीएम और इलेक्शन कानूनगो जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय मौजूद हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते यहां कई सालों से कूड़े का अवैध केंद्र चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद ने स्वच्छता अभियान के प्रचार के लिए सचिवालय की दीवारों पर तस्वीरें बनवाई हैं, लेकिन उसी परिसर में कूड़े के ढेर से फैली बदबू लोगों के लिए मुसीबत बन गई है।
कैसे बना कूड़े का केंद्र?
सूत्रों के मुताबिक, कुछ साल पहले नगर पंचायत को कचरा निस्तारण के लिए जगह न मिलने पर मिनी सचिवालय परिसर में अस्थायी तौर पर कूड़ा डंप करने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, अब पपरोला में कूड़ा निस्तारण संयंत्र शुरू हो चुका है, लेकिन नगर परिषद ने अभी तक इस केंद्र को हटाया नहीं है। नगर परिषद की गाड़ियां यहां रोजाना सूखा कचरा डंप करती हैं, जिससे पूरे परिसर में गंदगी और दुर्गंध फैल रही है।
तहसीलदार के आदेश भी हुए नजरअंदाज
दिसंबर और फरवरी में तहसीलदार रमन ठाकुर ने नगर परिषद को इस केंद्र को हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। तहसीलदार ने बताया कि इस केंद्र के लिए नगर परिषद कोई शुल्क नहीं दे रही है और निजी विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति भी नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसे हटाने की व्यवस्था की जाएगी।
नगर परिषद की लापरवाही
नगर परिषद की अध्यक्ष आशा भाटिया ने माना कि मिनी सचिवालय में कूड़े का केंद्र सही नहीं है और उन्होंने इसे हटाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सवाल यह है कि जब पपरोला में संयंत्र शुरू हो चुका है, तो यह केंद्र अभी तक क्यों चल रहा है?
मिनी सचिवालय में आने वाले लोग और कर्मचारी इस गंदगी से परेशान हैं। वार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय अवस्थी ने कहा कि सचिवालय प्रशासनिक केंद्र है, यहां कूड़ा डंप करना गलत है। गर्मियों में यह समस्या और बढ़ सकती है।
सवाल जो मांग रहे हैं जवाब
- मिनी सचिवालय की दीवारों पर निजी विज्ञापन बोर्ड कैसे लगे?
- परिसर की सफाई की जिम्मेदारी किसकी है?
- क्या अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं?
जब तक प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाएगा, तब तक बैजनाथ का मिनी सचिवालय कूड़े के ढेर और लापरवाही का प्रतीक बना रहेगा।
