बैजनाथ (कांगड़ा), 25 अप्रैल 2025: कांगड़ा जिला के ऐतिहासिक बैजनाथ शिव मंदिर के अस्तित्व को खतरा बन चुके भूस्खलन पर अब प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। हर वर्ष बरसात के मौसम में बनवा खड्ड की ओर स्थित पहाड़ी का एक हिस्सा खिसकता है, जिससे इस प्राचीन मंदिर की संरचना को गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
जिलाधीश हेमराज बैरवा के निर्देशों पर आईआईटी मंडी की विशेषज्ञों की एक टीम शुक्रवार को स्थल का दौरा कर भूस्खलन के कारणों और समाधान पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर भूस्खलन को रोकने के लिए बजट का प्रावधान किया जाएगा, ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके।

पिछले सात वर्षों से मंदिर के साथ पहाड़ी के इस भाग में भूस्खलन की समस्या बनी हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इसके लिए 40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की थी, लेकिन यह राशि इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए अपर्याप्त साबित हुई। इस राशि से मात्र दो रिटेनिंग वॉल ही बन सकीं। इसके बाद किसी भी सरकार या पुरातत्व विभाग ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब जिलाधीश के निर्देशों के बाद इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की उम्मीद जगी है।
किशोरी लाल, विधायक ने कहा, “ऐतिहासिक शिव मंदिर के कारण ही बैजनाथ का अस्तित्व है और यह ऐतिहासिक धरोहर पूरे हिमाचल की शान है। मैं इसके अस्तित्व को बचाने के लिए सदैव प्रयासरत रहूंगा।”
देवी चंद ठाकुर, एसडीएम बैजनाथ ने बताया, “जिलाधीश के निर्देशों के तहत शुक्रवार को आईआईटी मंडी की टीम इस स्थान का जायजा लेकर अपनी रिपोर्ट देगी और उसी पर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”
यह कदम न केवल बैजनाथ शिव मंदिर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को बचाने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास साबित हो सकता है।
