बैजनाथ, 8 मई 2025: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बैजनाथ और इसके अंतर्गत आने वाले राजकीय उच्च पाठशाला उस्तेहड़ व महालपट्ट में कार्यरत 34 कर्मचारियों को अप्रैल 2025 का वेतन अभी तक नहीं मिला है। इसका मुख्य कारण स्कूल के प्रधानाचार्य का छुट्टी पर होना और वेतन बिल पर हस्ताक्षर न होना बताया जा रहा है। इसके अलावा, स्कूल में चल रही आपसी खींचतान और प्रबंधन समिति के साथ पुराने विवादों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

प्रधानाचार्य की छुट्टी और बिल रुके
लिपिकों का कहना है कि अप्रैल माह के वेतन बिल ट्रेजरी में नहीं भेजे गए, क्योंकि प्रधानाचार्य ने उन पर हस्ताक्षर नहीं किए। प्रधानाचार्य ने छुट्टी के लिए आवेदन किया था और वर्तमान में स्कूल नहीं आ रहे हैं। शिक्षा उपनिदेशक ने 6 मई को प्रधानाचार्य को मेल के माध्यम से उनकी छुट्टी रद्द करने और स्कूल आकर वेतन प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था। इसके बावजूद, प्रधानाचार्य ने 9 मई तक दोबारा छुट्टी के लिए आवेदन कर दिया है। 10 से 12 मई तक स्कूल में पहले से छुट्टियां हैं, जिसके चलते कर्मचारियों को वेतन के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी
वेतन विवाद के बीच स्कूल की एक विंग की बिजली भी काट दी गई है। पिछले तीन महीनों से बिजली बिल न चुकाने के कारण बिजली विभाग ने यह कदम उठाया। स्कूल में लगे चार मीटरों में से एक की बिजली कटने से छात्रों को पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आपसी विवाद
बैजनाथ स्कूल पहले भी प्रबंधन समिति और स्कूल प्रशासन के बीच विवादों के कारण चर्चा में रहा है। कुछ महीने पहले प्रबंधन समिति की अध्यक्ष और प्रधानाचार्य के बीच स्कूल के कार्यों को लेकर तनातनी हुई थी, जिसके बाद अध्यक्ष को हटा दिया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें दोबारा नियुक्त करना पड़ा। इस विवाद की गूंज मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी, और सात सदस्यीय समिति ने इसकी जांच की थी। जांच के बाद भी स्कूल स्टाफ के बीच तनाव बरकरार है, जिसका खामियाजा कर्मचारियों और छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
कर्मचारियों में रोष, सफाई कर्मचारी भी प्रभावित
वेतन न मिलने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। स्कूल प्रबंधन समिति के तहत कार्यरत दो सफाई कर्मचारियों को भी अप्रैल का वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि आपसी खींचतान के कारण न केवल उनका वेतन रुका है, बल्कि स्कूल का माहौल भी प्रभावित हो रहा है।
शिक्षा विभाग और सरकार पर सवाल
यह विद्या का मंदिर अब हास्य और विवाद का केंद्र बन चुका है। कर्मचारियों का आरोप है कि न तो सरकार, न ही शिक्षा विभाग और न ही शिक्षा मंत्री के पास इस समस्या का कोई ठोस हल है। स्कूल में स्टाफ के कुछ सदस्यों के बीच अंतर्द्वंद्व चरम पर है, जिसका असर स्कूल के संचालन और छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
शिक्षा उपनिदेशक के आदेश के बावजूद प्रधानाचार्य की अनुपस्थिति और छुट्टी के नए आवेदन ने वेतन प्रक्रिया को और लटका दिया है। कर्मचारियों को अब कम से कम 12 मई तक इंतजार करना पड़ सकता है। इस बीच, बिजली कटौती और आपसी विवादों ने स्कूल की स्थिति को और बदतर कर दिया है। शिक्षा विभाग से इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, ताकि कर्मचारियों को उनका हक मिल सके और स्कूल का सामान्य संचालन बहाल हो।
