नई दिल्ली: मोटापा आज दुनियाभर में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है, जिससे निपटने के लिए लोग डाइटिंग का सहारा लेते हैं। लेकिन हाल ही में एंड हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अत्यधिक डाइटिंग मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है और डिप्रेशन का खतरा बढ़ा सकती है। यह स्टडी उन लोगों के लिए खासतौर पर महत्वपूर्ण है जो वजन कम करने के लिए सख्त डाइट प्लान फॉलो कर रहे हैं।
क्या कहती है स्टडी?
अमेरिका में 28,000 से अधिक वयस्कों पर किए गए इस अध्ययन में डाइट पैटर्न और डिप्रेशन के लक्षणों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि जो लोग अत्यधिक कम कैलोरी वाली डाइट फॉलो करते हैं, खासकर पुरुष और अधिक वजन वाले लोग, उनमें डिप्रेशन के लक्षण अधिक देखे गए। इसके अलावा, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, सेचुरेटेड फैट, प्रोसेस्ड मीट और अत्यधिक मीठी चीजों वाली डाइट लेने वालों में भी डिप्रेशन का स्तर ऊंचा पाया गया।
वहीं, मेडिटेरेनियन डाइट फॉलो करने वालों में डिप्रेशन का खतरा कम देखा गया। इस डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स और जैतून का तेल जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।
एक्सपर्ट की सलाह
स्टडी के मुख्य लेखक डॉ. वेंकट भट ने सलाह दी कि लोगों को सख्त डाइटिंग से बचना चाहिए, खासकर उन लोगों को जो अपने वजन को लेकर पहले से ही तनाव में हैं। उन्होंने कहा कि वजन कम करने की योजना बनाने से पहले किसी पोषण विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। असंतुलित डाइट न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
मोटापा: एक वैश्विक महामारी
बदलती जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों के कारण मोटापा भारत सहित पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मोटापा अब एक महामारी का रूप ले चुका है। भारत में भी मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, जिसके चलते लोग डाइटिंग और वजन नियंत्रण के तरीकों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन इस स्टडी ने साफ कर दिया है कि डाइटिंग का तरीका गलत होने पर यह नई समस्याएं पैदा कर सकता है।
क्या करें?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि वजन कम करने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए। मेडिटेरेनियन डाइट जैसे पौष्टिक आहार अपनाने से न केवल वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। साथ ही, डाइटिंग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है ताकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
यह स्टडी उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे सख्त डाइटिंग का रास्ता चुनते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो संतुलन और जागरूकता ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
