चंबा 5 सितंबर 2025: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की सुषम ठाकुर ने उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान आई सदी की सबसे बड़ी आपदा का आंखों देखा हाल साझा किया। करीब 14 दिनों तक मणिमहेश और भरमौर में फंसी रहीं सुषम ने बताया कि डल झील में गलत कार्यों और श्रद्धा के अभाव में आए व्यवहार के कारण यह प्रलय आई। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे भोले बाबा के दरबार में श्रद्धा और आस्था के साथ आएं, गंदगी न फैलाएं और डल झील में स्नान करने के बजाय केवल गौरीकुंड में स्नान करें।
चंबा, 5 सितंबर 2025: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर की सुषम ठाकुर ने उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा के दौरान आई सदी की सबसे बड़ी आपदा का आंखों देखा हाल साझा किया। करीब 14 दिनों तक मणिमहेश और भरमौर में फंसी रहीं सुषम ने बताया कि डल झील में गलत कार्यों और श्रद्धा के अभाव में आए व्यवहार के कारण यह प्रलय आई। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे भोले बाबा के दरबार में श्रद्धा और आस्था के साथ आएं, गंदगी न फैलाएं और डल झील में स्नान करने के बजाय केवल गौरीकुंड में स्नान करें।
सुषम ठाकुर, जो पिछले छह सालों से मणिमहेश यात्रा में लंगर सेवा से जुड़ी हैं, ने बताया कि वह और उनके साथी 20 अगस्त को भरमौर से मणिमहेश के लिए रवाना हुए थे और 22 अगस्त को डल झील पहुंचे। लेकिन 23 अगस्त को मौसम अचानक खराब हो गया और रात से भारी बारिश शुरू हो गई। लगातार बारिश के कारण डल झील और परिक्रमा मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो गया। दुकानदार, लंगर सेवा में लगे लोग और श्रद्धालु चिंता में डूब गए। नीचे नाले में पानी का स्तर बढ़ने से कई लंगर बह गए और रास्ते पूरी तरह तबाह हो गए।
सुषम ने कहा, “डल झील पर कई गलत कार्य हो रहे हैं। लोग गंदगी फैला रहे हैं, सरेआम नशा कर रहे हैं और नशा बिक्री तक हो रही है। कई लोग श्रद्धा के बजाय पिकनिक और मस्ती के मूड में भोले के दरबार पहुंच रहे हैं। भगवान भोलेनाथ ने लंबे समय तक सब सहन किया, लेकिन इस बार प्रलय आनी ही थी। फिर भी उनकी कृपा से सभी श्रद्धालु सुरक्षित रहे।”
बारिश के कारण यात्रा बंद कर दी गई और डल झील पर फंसे लोगों को लंगरों में उपलब्ध राशन से भोजन दिया गया। एनडीआरएफ और पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी को सुरक्षित निकाला। सुषम और उनके साथी 2 सितंबर को भरमौर पहुंचे और एक दिन वहां रुकने के बाद चंबा के लिए रवाना हुए।
सुषम ने श्रद्धालुओं से अपील की कि भविष्य में मणिमहेश यात्रा पर आने वाले लोग आस्था और श्रद्धा के साथ आएं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अनुरोध किया कि वे डल झील में स्नान न करें और केवल गौरीकुंड में ही स्नान करें। उन्होंने कहा, “यह आपदा हमें सबक देती है कि भोले बाबा के दरबार में पवित्रता और श्रद्धा बनाए रखें, ताकि उनकी कृपा हम सभी पर बनी रहे।”
इस आपदा ने मणिमहेश यात्रा के प्रति लोगों की जिम्मेदारी को और बढ़ा दिया है। सुषम की यह कहानी न केवल एक चेतावनी है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक प्रेरणा भी है कि वे इस पवित्र तीर्थस्थल की गरिमा को बनाए रखें।
