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October 1, 2026
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Baijnath: सेहल में विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन, सनातन संस्कृति और एकता पर जोर

बैजनाथ (कांगड़ा), 26 दिसंबर 2025: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सेहल में 25 दिसंबर को एक विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आसपास की विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना और समाज को धार्मिक एवं सांस्कृतिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-यज्ञ से हुई, जिसमें गांव के लगभग सभी परिवारों ने हिस्सा लिया। इसके बाद तुलसी पूजन का विशेष आयोजन किया गया, जो भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण, पारिवारिक शुद्धता और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों और वक्ताओं को श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया गया तथा सभी से नियमित गीता पाठ करने का आग्रह किया गया। वक्ताओं ने गीता को जीवन के संघर्षों में मार्गदर्शन देने वाला दर्शन बताया।

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के संगठन मंत्री चंदन बौद्ध मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पंच परिवर्तन—सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और स्वभाव जागरण—पर जोर देते हुए समाज में इन बदलावों को लाने का आह्वान किया। यह पंच परिवर्तन आरएसएस के शताब्दी वर्ष का प्रमुख संकल्प है, जिसके माध्यम से समाज को मजबूत और एकजुट बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सम्मेलन में सांस्कृतिक प्रस्तुति के रूप में गांव के बच्चों ने पारंपरिक पहाड़ी नाटी नृत्य पेश किया, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। सभी पंचायत प्रतिनिधि विशेष रूप से मौजूद रहे। विभिन्न वक्ताओं ने सनातन धर्म के ऐतिहासिक महत्व, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की संपूर्ण व्यवस्था है।

वक्ताओं ने चिंता जताई कि आज सनातन धर्म को संगठित दुष्प्रचार और आर्थिक प्रलोभनों से धर्मांतरण के प्रयासों से खतरा है। साथ ही देवी-देवताओं और सांस्कृतिक प्रतीकों के अपमान पर भी गहरी पीड़ा व्यक्त की। ग्रामीणों से अपील की गई कि जाति-पांति और भेदभाव त्यागकर पहले हिंदू के रूप में अपनी पहचान बनाएं और एकता मजबूत करें। विशेष जोर बच्चों और युवाओं पर दिया गया कि आने वाली पीढ़ी को सनातन मूल्यों से जोड़ना जरूरी है, वरना भविष्य की पीढ़ियां हमारी उदासीनता को दोष देंगी।

मुख्य वक्ता ने उदाहरण देते हुए कहा कि हमें हर घर से छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज जैसे योद्धा चाहिए , जो धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के लिए खड़े हों। सनातन के इस महायज्ञ में हर व्यक्ति को अपनी आहुति देनी होगी।

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों द्वारा भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। यह सम्मेलन सनातन चेतना के पुनर्जागरण का सशक्त प्रयास साबित हुआ, जिसने समाज को आत्ममंथन और एकजुटता का संदेश दिया।

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