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June 11, 2026
Palampur

कृषि विश्वविद्यालय व डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में प्रदेश सरकार ना करें राजनीतिक हस्तक्षेप, पीयूष (इकाई उपाध्यक्ष)

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पालमपुर महाविद्यालय द्वारा कृषि विश्विद्यालय व डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे राजनीतिकरण के विरोध में पालमपुर महाविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया गया।
इकाई उपाध्यक्ष पीयूष ने कहा कि यह शिक्षा का राजनीतिकरण जो कि छात्र विरोधी सरकार द्वारा निरंतर रूप से किया जा रहा है चाहे उसमें बात करें सरदार पटेल विश्वविद्यालय का दायरा घटाने की या कृषि विश्वविद्यालय व डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में राजनीतिक हस्तक्षेप की, यह सरकार निरंतर छात्र विरोधी निर्णय ले रही है। सरदार पटेल विश्वविद्यालय का दायरा बहाली के लिए भी विद्यार्थी परिषद निरंतर आंदोलनरत है।
इसी बीच इस छात्र विरोधी सरकार ने एक और ऐसा फैसला लिया जो शिक्षा हित के खिलाफ हैं नौणी विश्वविद्यालय एवं पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में जो उप कुलपति की नियुक्ति जो राज्यपाल द्वारा एक प्रोपर प्रोसेस के साथ की जाती थी ,उस नियुक्ति में अब सरकार बिलो में संशोधन कर हस्तक्षेप करेगी जिसका सीधा सीधा अर्थ है विश्विद्यालय में राजनीति करके अपने चहेतों को कुर्सी पर बैठाना है हिमाचल प्रदेश कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम, 1986 के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश में दो विश्वविद्यालय चल रहे हैं जो अपनी शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर को लेकर अच्छी रैंकिंग पर रहते हैं। उसमें से एक चौधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर है तथा दूसरा डॉ० यशवन्त सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन है। अगर दोनों विश्वविद्यालयों की कार्य पद्धति को देखा जाए तो इनका नाम देश के अच्छे विश्वविद्यालयों में आता है। परंतु सरकार ने जो संशोधन लाए हैं, सरकार इस संशोधनों के माध्यम से इन दोनों विश्वविद्यालयों में अपना हस्तक्षेप करना चाहती है। अभी तक इन विश्वविद्यालयों के उप-कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति यानी हमारे प्रदेश के राज्यपाल महोदय करते हैं। उसका पूरा प्रोसैस एक रिसर्च कमेटी तय करती है। वह कमेटी बायोडाटा मंगवाती है और उनमें से एक अच्छे शिक्षाविद्ध की योग्यता को देखकर उसे उप-कुलपति नियुक्त किया जाता है। परंतु इस सरकार ने जो संशोधन लाए हैं कि कुलाधिपति उप-कुलपति की नियुक्ति सरकार की सहायता और सलाह पर करेंगे, हमें इस पर कड़ी आपत्ति हैं क्योंकि इस प्रकार से विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली पर सरकार का यह सीधा-सीधा हस्तक्षेप है। जिससे कि विश्वविद्यालय की स्वायत्त के खंडन का प्रयास है जबकि हमारे विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्थाएं हैं। इन स्वायत्त संस्थाओं में हस्तक्षेप करना न तो प्रदेश हित में है और न ही इन विश्वविद्यालयों के हित में है। इस प्रकार के संशोधन करके प्रदेश सरकार राज्यपाल के अधिकारों को कम करने की कोशिश करने जा रही है। अतः अगर इस संशोधन को जल्द वापिस नहीं लिया जाता है तो विद्यार्थी परिषद अपना आंदोलन को और उग्र करेगी।
जारीकर्ता
पीयूष
(इकाई उपाध्यक्ष )
8894574157

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